उत्तराखंड के अस्पतालों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाएगा NGT, पढ़ें क्यों…?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मंगलवार को उत्तराखंड के अस्पतालों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य में जैव चिकित्सकीय एवं ठोस कचरे का उचित तरीके से संग्रहण, पृथक्कीकरण और निपटारा किया जाए।

एनजीटी ने कहा कि इसका उल्लंघन करने पर उन्हें पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये देने होंगे। एनजीटी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राज्य में विभिन्न अस्पतालों की सूची सौंपने तथा चिकित्सकीय कचरे के निपटारे के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘राज्य सरकार राज्य के उन अस्पतालों पर 50 हजार रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाएगी, जिनके पास जैव चिकित्सकीय कचरे के उचित ढंग से संग्रहण, पृथक्कीकरण और निपटारे के लिए विस्तृत तंत्र नहीं है।’

यह निर्देश उस समय आया जब गंगा की सफाई के लिए याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता एमसी मेहता ने कहा कि एनजीटी के निर्देश का केवल 10 प्रतिशत अनुपालन किया गया। उन्होंने कहा कि हरिद्वार के अस्पतालों के पास कूड़े के निपटारे के लिए उचित जगह नहीं है।