उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए ‘DEEKSHA’ कार्यक्रम का शुभारम्भ

प्रदेश के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह द्वारा वीडीओ का्रफेंन्सिग के जरिये जिलाधिकारियो से वार्ता कर शिक्षा विभाग द्वारा संचालित योजना की समीक्षा की। मुख्य सचिव द्वारा विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम दीक्षा (डेडीकेशन टू एनहेंस एजूकेशन थ्रू नाॅलेज स्किल एण्ड हैबिट एसेसमेंट) का शुभारम्भ किया गया। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि विभिन्न कक्षाओं मे अध्ययरत छात्र/छा़त्राओ को विभिन्न प्रकार की छात्रवृति आॅनलाइन की जानी है।

इसलिए सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक विद्यालयो के छात्रो-छात्राओं के आधारकार्ड बने तथा सभी छात्रो-छात्राओं के बैक खाते खोलते हुये उन्हे आधार से लिंक कराया जाए। इस कार्य को अभियान के रूप में सम्पन्न किया जाना है। उन्होने जिलाधिकारियो को आपदा मद से क्षतिग्रस्त विद्यालयो की प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक मरम्मत कराये जाने के निर्देश भी दिये।
मुख्य सचिव श्री सिह ने कहा कि सरकार द्वारा प्रत्येक विकास खण्ड मे आदर्श विद्यालय खोलने का प्रयोग काफी सफल रहा है। ऐसे विद्यालयोें मे छात्रो-छात्राओं का पंजीकरण प्रतिशत बढा है। उन्होने जिलाधिकारियो से कहा कि वह आदर्श विद्यालयो के साथ ही अन्य विद्यालयों का निरीक्षण करें तथा शिक्षा की गुणवत्ता एवं अध्यापकों की उपस्थिति को परखें। उन्होने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में विकास होना सरकार की प्राथमिता है। उन्होने जिलाधिकारियों से शिक्षा महकमे द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा करने के भी निर्देेश दिये।

जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि जनपद में शिक्षा विभाग के कार्यकमो एवं योजनाओ की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। इसके साथ ही वे स्वयं विद्यालयों में जाकर शिक्षा की जांच करते है। तथा वे विद्यालयों मे छात्र-छात्रओं से दोतरफा संवाद स्थापित कर उनके बौद्धिक स्तर का मुल्यांकन किया जाता है। समय-समय पर स्वास्थ्य महकमे द्वारा विद्यालयो मे बच्चो के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाये जाते है। उन्होने बताया कि जनपद के क्षतिग्रस्त विद्यालयो को आपदा मद से धनराशि दिये जाने हेतु स्टीमेट तैयार कराये जा रहे है। क्षतिग्रस्त विद्यालयो को आवश्यक मरम्मत के लिए धनराशि आवंटन उनकी प्राथमिकता में है।

सचिव विद्यालयी शिक्षा डी.सेंथिल पांडियन ने दीक्षा के माध्यम से प्रारम्भिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सतत् व व्यापक मूल्यांकन(कांटीन्युवस एण्ड कांप्रीहेंसिव एवेल्युएशन) के बारे में विस्तार जानकारी दी। उन्होंने शिक्षा अधिकारियों को माध्यमिक स्तर पर अधिगम स्तर आंकलन (लर्निंग लेवल एसेसमेंट) के बारे में बताया। सतत् और व्यापक मूल्यांकन में सभी बच्चों के सभी पक्षों का मूल्यांकन किया जाए। इसमें शैक्षिक पक्ष, सह-शैक्षिक पक्ष (रूचि, खेलकूद, संगीत, कला, व्यवहार, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदि से संबंधित) शामिल है। अधिगम स्तर आंकलन में कक्षा 9 के विद्यार्थियों के अकादमिक पक्ष (हिन्दी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी विषयों में लर्निंग लेवल) का आंकलन किया जाए। आंकलन के बाद बच्चों को सुधारात्मक शिक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि कक्षा कक्ष में दीक्षा कार्यक्रम के तहत कक्षावार और विषयवार संकेतक(इंडीकेटर) बनाये गये है। इसके आधार पर माॅनिटरिंग की जाए। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जवाबदेही भी तय की गई है। वीडियो कांफेन्सिग में जिला शिक्षा अधिकारी रघुनाथ लाल आर्य के अलावा शिक्षा महकमे के अन्य अधिकारी एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी मौजूद थे।