इस बार एक अगस्त को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, जानें व्रत और जलाभिषेक का महत्व

इस बार किसी ने 16 जुलाई को भोले बाबा का जलाभिषेक किया है तो कोई बुधवार 20 जुलाई को शिव को पानी चढ़ा रहा है। अलग-अलग मान्यता के अनुसार दोनों तिथियों से श्रावण मास की शुरुआत मानी जा रही है। वहीं, सोमवार को शिवरात्रि पर्व पड़ने का विशेष महत्व होगा। इस दिन बाबा का जलाभिषेक और पूजन करने का महत्व दोगुना होगा।

सूर्य संक्रांति के अनुसार श्रावण मास का आरंभ 16 जुलाई से हो गया, वहीं चंद्र तिथि के अनुसार श्रावण मास 20 जुलाई से शुरू होगा। माना जाता है कि श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को भोले बाबा का अभिषेक करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार सूर्य माह के अनुसार श्रावण में पांच सोमवार और चंद्र माह के अनुसार चार सोमवार पड़ेंगे।

उन्होंने बताया कि श्रावण माह में व्रत करने पर अक्षय फल की प्राप्ति होती है। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार एक अगस्त को शिवरात्रि का पर्व है। इस दिन प्रात: 4.12 बजे के पश्चात भोले बाबा को जलाभिषेक कर सकते हैं।

टपकेश्वर मंदिर के स्वामी किशन गिरी के अनुसार वैसे तो रोज ही कांवड़िए मंदिर में जल चढ़ा रहे हैं, लेकिन शिवरात्रि के दिन सभी जलाभिषेक पूर्ण हो जाएंगे। उस दिन कांवड़ का जल चढ़ाने का आखिरी दिन होगा।

गन्ने का रस, गाय का दूध, शहद, गंगाजल आदि से भगवान शिवजी का अभिषेक करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। बेल पत्र, कमल पुष्प आदि शिवजी को चढ़ाने से मनोरथ की प्राप्ति होती है। व्रत करने से उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है। ‘ऊं नम: शिवाय मंत्र’ का जप करना चाहिए।

श्रावण की संक्रांति (हरेला) 16 जुलाई को था। इस दिन प्रात: 10.05 बजे सूर्य कर्क राशि में प्रवेश कर गए।