बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से विधानसभा कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति मांगी

सुप्रीम कोर्ट

उत्तराखंड के अयोग्य ठहराए गए कांग्रेस के नौ विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक नई याचिका दायर की। उन्होंने 21 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी।

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन सहित विधायकों ने अपनी नई याचिका के समर्थन में अरुणाचल प्रदेश मामले में शीर्ष अदालत के हालिया फैसले का उल्लेख किया जिसके अनुसार उन्हें ऐसा विधानसभा अध्यक्ष अयोग्य नहीं ठहरा सकता जो स्वयं उसे हटाने के प्रस्ताव का सामना कर रहा हो।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें उन्होंने चैंपियन और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत अन्य को अयोग्य ठहराया था और विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में दो अपील लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पैरा 175 का उल्लेख करते हुए विधायकों ने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 179 (सी) विधानसभा अध्यक्ष, जिसके खिलाफ हटाए जाने का प्रस्ताव लंबित है, वह किसी सदस्य को अयोग्य नहीं ठहरा सकता।

न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा था, ‘हम संतुष्ट हैं, कि ‘विधानसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव’ विधानसभा अध्यक्ष को 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्यवाही पर आगे बढ़ने से रोकेगा क्योंकि वह एक या अधिक विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के बाद ‘तत्कालीन सभी सदस्यों’ के प्रभाव को खत्म कर देगा।’

शीर्ष अदालत की टिप्पणी पर भरोसा करते हुए अयोग्य ठहराए गए विधायकों ने 27 मार्च 2016 के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को निरस्त करने की मांग की है, जिसमें उन्हें अयोग्य ठहराया गया था। वैकल्पिक रूप से उन्होंने 21 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी है।

हरीश रावत सरकार ने 10 मई को शीर्ष अदालत के आदेश पर कराए गए शक्ति परीक्षण में जीत हासिल की थी। इसमें बागियों को अपना मत डालने से रोका गया था।