दो दिनों की बारिश से समूचे उत्तराखंड में भारी नुकसान, 10 लोगों की मौत

टिहरी जिले में रविवार को एक कार पहाड़ी से हुए भूस्खलन की चपेट में आ गई, जिससे उसमें सवार सभी चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पिछले दो दिनों से उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में लगातार भारी बारिश के कारण अब तक मरने वालों की संख्या 10 हो गई।

लगातार बारिश होने से गंगा, यमुना तथा उनकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। पहाड़ों से मलबा आने से राष्ट्रीय राजमार्गों सहित राज्य के कई मार्ग अवरूद्घ हो गए हैं और चार धाम यात्रा व कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी प्रदेश में लगातार जारी भारी बारिश के मद्देनजर रविवार को राज्य आपदा प्रबंधन और न्यूनीकरण केंद्र (डीएमएमसी) का दौरा किया तथा अधिकारियों को हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा।

टिहरी जिले में ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नरेंद्रनगर बाइपास के पास पहाड़ से भारी भूस्खलन होने से ऋषिकेश से चंबा की ओर से जा रही एक कार मलबे में दब गई। पुलिस, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और सेना के जवानों ने मलबा हटाकर कार से शवों को बाहर निकाला।

नरेंद्रनगर के उपजिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने बताया कि हादसा दोपहर साढ़े बारह बजे भारी बारिश के बीच हुआ। मृतकों की पहचान ऋषिकेश निवासी वीरेश श्रीकोटी (32), उमेश रावत (33), मुकेश गुसाईं (33) और श्याम नौटियाल (25) के रूप में हुई है।

अधिकारी ने बताया कि गाड़ी मलबे में इस कदर दब गई थी कि गाड़ी को काटकर शवों को टुकडों में बाहर निकाला गया। बारिश के कारण पिछले 24 घंटों में प्रदेश में हुई अलग-अलग दुर्घटनाओं में अब तक 10 लोगों की मौत हुई है।

गढ़वाल अंचल में पौड़ी जिले के श्रीनगर के पास शनिवार रात एक कार बारिश के कारण सड़क पर फिसलने से अनियंत्रित होकर 200 मीटर गहरे खड्ड में गिर गई, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। एक अन्य घटना में उत्तरकाशी जिले के बडकोट क्षेत्र में नन्द गांव में शनिवार रात एक गौशाला पर पेड़ गिरने से उसके नीचे मौजूद दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई और एक अन्य घायल हो गया।

नैनीताल जिले के हल्द्वानी में तेज बारिश के चलते उफनाई एक बरसाती नदी में एक बस के बह जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

उत्तराखंड राज्य आपातकालीन केंद्र से मिली सूचना के अनुसार, पिछले 24 घंटों में अस्थायी राजधानी देहरादून सहित अधिकांश हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान राज्य में सर्वाधिक 238.76 मिलीमिटर (मिमी) बारिश नैनीताल में दर्ज की गई, जबकि हल्द्वानी में 214 मिमी, चोरगलिया में 156 मिमी, बागेश्वर में 120 मिमी, रामनगर में 117.06 मिमी, सोमेश्वर में 105 मिमी, अल्मोडा में 103.2 मिमी, सल्ट में 100 मिमी, देहरादून में 91.04 मिमी, कपकोट में 82.50 मिमी, गरूड में 80 मिमी, चौखुटिया और बडकोट में 75 मिमी बारिश दर्ज की गई।

उधर, कुमांऊं क्षेत्र में जिम कॉर्बेट राष्टीय पार्क के झिरना और ढेला के गेट बारिश के कारण पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। लगातार बारिश से प्रदेश में गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों सहित अन्य नदियां भी उफान पर आ गई हैं। हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 294 मीटर के करीब (293.30 मीटर) पहुंच गया है। ऋषिकेश में भी गंगा खतरे के निशान 340.50 मीटर के नजदीक (339.31 मीटर) बह रही है।

नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए लक्सर और खानपुर क्षेत्र के गंगातटीय गांवों में बाढ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और नदी किनारे लगातार गश्त की जा रही है। छह पुलिस टुकडियों को अलर्ट पर रखा गया है और पांच राफ्ट बोटों को किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है।

कुमांऊ के पिथौरागढ़ जिले में कालीनदी भी खतरे के निशान 890 मीटर के पास (889.20 मीटर) बह रही है। जबकि चंपावत में शारदा नदी खतरे के निशान 221.70 मीटर के पास (221.10 मीटर) पहुंच गई है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा आने से प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कई मार्ग यातायात के लिये बंद हो गए हैं।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 लामबगड और कंचनगंगा के पास अवरूद्घ है जबकि ऋषिकेश-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 109 सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच पार्किंग और मुनकुटिया के पास बंद है।

हल्द्वानी-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबा आने के कारण यातायात के लिए बंद है। हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 का कुछ हिस्सा बहने से वहां यातायात रोक दिया गया है।

हरिद्वार की जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बताया कि हरिद्वार में मंसादेवी मंदिर के नीचे रेलवे ट्रैक पर मलबा और बरसात का पानी जमा होन से रेल मार्ग बाधित हुआ। हरिद्वार में बाढ़ जैसी स्थिति से प्रभावित गांवों में प्रशासन ने भोजन सामग्री भी बांटी।

उधर, उत्तरकाशी जिले के जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी ने मौसम विभाग की अगले 24 घंटे में भी भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिले में प्राइमरी विद्यालयों से लेकर इंटरमीडियेट तक के सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों को 18 और 19 जुलाई को दो दिनों के लिए बंद रखने के आदेश दिए हैं।

चौधरी ने लगातार बारिश के कारण गंगोत्री से ऊपर गोमुख जाने पर भी रोक लगा दी है। इसबीच, मुख्यमंत्री रावत ने रविवार को डीएमएमसी का औचक निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से प्रदेश में बारिश से उत्पन्न स्थिति के बारे में जानकारी ली।

इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारियों से फोन पर बातचीत भी की और उनसे बारिश की स्थिति पर नजर रखने, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा।

बाद में, संवाददाताओं से मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ स्थानों पर सामान्य क्षति हुई है, लेकिन कहीं पर भी चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है और अधिकारी क्षेत्र में काम में लगे हुए हैं। वहीं भारी बारिश के कारण प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का उत्तरकाशी जिले के पुरोला और रुद्रप्रयाग जिले का तीन दिसवीय दौरा रद्द हो गया है।