उत्तराखंड में पौड़ी जिले के श्रीनगर से 17 किलोमीटर दूर धारीदेवी मंदिर के निकट थैलीसैंण गांव में अलकनन्दा नदी के जलस्तर बढ़ने से आठ घर पानी में बह गए, जबकि पास में ही मौजूद एक मंदिर भी पानी में डूब गया।

कहा जाना चाहिए कि वहां के लोगों की किस्मत अच्छी थी कि इन घरों में पिछले कुछ दिनों से कोई रह नहीं रहा था। ये सभी टीन के भवन जलविद्युत परियोजना के डूबे क्षेत्र में थे। थैलीसैंण गांव में नदी किनारे मौजूद अन्य आवासीय भवनों को भी अलकनन्दा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से खतरा बना हुआ है। यदि नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो ग्रामीणों को अपने घरों को छोड़ना पड़ेगा।

प्रभावित ग्रामीण दिनेश लाल, महेश लाल और रमेश लाल का कहना है कि काफी समय से वे लोग उन भवनों में रह नहीं रहे थे, हालांकि उनमें कुछ सामान जरूर मौजूद था, जो बह गया है। उनका कहना है कि जलविद्युत परियोजना संस्था ने बहे भवनों का अब तक मुआवजा नहीं दिया है।

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दूसरी तरफ पौराणिक सिद्धपीठ धारी मंदिर को जाने वाली पुलिया से सटे रास्ते पर पुश्ता धंसने से दरारें पड़ गई हैं। मंदिर सम्पर्क मार्ग पर पड़ी दरारों पर यदि जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी लगातार होते भूधंसाव से किसी भी दिन मंदिर का सम्पर्क अन्य क्षेत्रों से कट सकता है।

लगातार तेज होते अलकनन्दा नदी के बहाव से धारीदेवी मंदिर और धारी झूला पुल पर भी खतरा मंडरा रहा है। नदी में बहकर आ रहे विशालकाय पेड़ों की लगातार धारीदेवी मंदिर के पिलरों पर लगती टक्कर से मंदिर में कम्पन पैदा हो रहा है।

साथ ही पुल के दूसरी तरफ के एबेडमैंट के किनारों तक पानी आने से धारीदेवी मंदिर के क्षतिग्रस्त होने की आंशका बनी हुई है।