उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में आज भी पहुंच पाना मुश्किल है। यहां वन संरक्षण अधिनियम के कारण गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने में खासी दिक्कतों का समाना करना पड़ता है। कई गांवों के लोग आजादी के बाद से ही सड़क की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं, लेकिन इसी अधिनियम के कारण आज तक वे सड़क मार्ग के जरिए देश-दुनिया से नहीं जुड़ पाए हैं।

वन संरक्षण अधिनियम के चलते सड़क से वंचित उत्तरकाशी जिले में सरबडियार क्षेत्र के आठ गांवों का धीरज आखिरकार जवाब दे गया। मंगलवार को ग्रामीणों ने खुद ही कुल्हाड़ी उठाकर 700 से ज्यादा बांज, बुरांश, चीड़, कुकाट के हरे पेड़ों का सफाया कर दिया। पिछले डेढ़ दशक से स्वीकृत गंगराली-बडियार सड़क समरेखण में अधिक पेड़ आने के कारण अधर में लटकी थी। साढ़े नौ किमी स्वीकृत सड़क इतने सालों में केवल दो किमी ही बन पाई थी।

उत्तरकाशी के बडियार क्षेत्र के आठ गांवों के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में आड़े आ रहे विभिन्न प्रजाति के छोटे-बड़े पेड़ों पर आरा कुल्हाड़ी चलाकर इस पिछड़े क्षेत्र और सरकारी रवैये के प्रति अपना आक्रोश प्रकट किया। पेड़ों की अवैध कटान की भनक लगते ही अपर यमुना वन प्रभाग के अधिकारी पुलिस और विभागीय कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे।

वन कर्मियों ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया और डबल सिंह, सोवेंद्र सिंह, रमेश दास प्रधान और शीशपाल सिंह सहित 66 लोगों के खिलाफ 26 फॉरेस्ट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया। अवैध कटान में क्षेत्र के सभी आठ गांवों पौंटी, छानियका, गौल, कसलों, किमडारा व सर आदि के ग्रामीण शामिल रहे।

रेंजर किशोरी लाल शाह ने कहा कि स्वीकृत सड़क वन भूमि के कारण लंबित है। ग्रामीणों ने वन भूमि के अलावा सिविल सोयम वन में भी पेड़ काटे हैं। पूछताछ तथा पातन किए गए पेड़ों की संख्या और माप के साथ पूछताछ जारी है। उन्होंने बताया कि अभी तक 240 पेड़ों के काटने की पुष्टि हुई है।

डीएफओ, अपर यमुना वन प्रभाग, डीके सिंह का कहना है कि वर्तमान स्वीकृत 9.5 किमी सड़क में अधिक पेड़ आने के कारण ग्रामीणों को समरेखण में बदलाव कराने का सुझाव दिया था। इसके लिए संयुक्त निरीक्षण होना था, लेकिन गांव वालों ने कानून हाथ में लेकर पेड़ काट कर गलत किया है।