सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के नेता और अपदस्थ मुख्यमंत्री नबाम तुकी को मुख्यमंत्री के रूप में बुधवार को बहाल कर दिया। इस फैसले की सराहना करते हुए विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है।

न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति एन. वी. रमना की सदस्यता वाली संविधान पीठ ने राज्य में सरकार की 15 दिसंबर, 2015 की जो स्थिति थी, उसे बहाल करने का निर्देश दिया। इस तरह तुकी फिर से मुख्यमंत्री के रूप में बहाल हो गए।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन और राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा के उन तमाम फैसलों को रद्द कर दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाकर 16 दिसंबर को तुकी सरकार को बर्खास्त कर दिया था। पीठ ने राज्यपाल राजखोवा के फैसले को अवैध एवं संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला बताया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोई टिप्पणी करने से पहले सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विस्तार से अध्ययन करेगी। उन्होंने कहा कि अदालत ने साल 2015 के दिसंबर वाली स्थिति बहाल करने का आदेश दिया है और उसके बाद बहुत सारी प्रगति हुई है, जिसमें राष्ट्रपति शासन की वापसी और कालिखो पुल के नेतृत्व में एक नई सरकार ने सत्ता भी संभाली है।

उन्होंने कहा कि जो कुछ किए जाने की जरूरत है, उस पर विस्तृत रूप से सोच-विचार करना है। प्रसाद ने इस बात को खारिज कर दिया कि केंद्र ने इस मामले में कानून का कोई कुप्रबंधन किया है। दूसरी तरफ गुवाहाटी में कालिखो पुल ने कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है और वह सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि शक्ति परीक्षण से साबित हो जाएगा कि संख्याबल उनकी सरकार के साथ है।

खुश नजर आ रहे तुकी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक ऐतिहासिक बताया और कहा कि न्यायालय का यह आदेश देश में स्वस्थ लोकतंत्र की रक्षा करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक एवं उल्लेखनीय फैसला है।

तुकी ने कहा, ‘इस फैसले के अनुसार हमारी सरकार बहाल हो गई है। मैं अपने राज्य जाऊंगा और कांग्रेस के सभी 47 विधायकों से बात करुंगा। हम लोग बैठक करेंगे।’ उत्तराखंड के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए इसे एक और झटका माना जा रहा है। मई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड की बर्खास्त हरीश रावत सरकार को इसी तरह बहाल कर दिया था।

तुकी ने अदालत का फैसला आने के बाद सोनिया गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह फैसला केंद्र सरकार को सत्ता का और दुरुपयोग करने से रोकेगा।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने’ के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के आदेश को ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तानाशाह सरकार’ के लिए करारा जवाब बताया है।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने ट्वीट कर कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला तानाशाह मोदी सरकार को करारा जवाब है। उम्मीद है कि मोदीजी इससे सबक लेंगे और लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकारों के मामलों में हस्तक्षेप बंद करेंगे।’

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को बहाल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी की सरकार से गैर भाजपा शासित राज्यों में केंद्रीय शासन थोपने की ‘उनकी बढ़ती निरंकुशवादी प्रवृत्ति’ छोड़ने के लिए कहा।

माकपा ने कहा, ‘उत्तराखंड के बाद शीर्ष अदालत का फैसला बीजेपी नीत केंद्र सरकार की राजनीतिक नैतिकता व जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।’ बीजेपी ने इन आरोपों पर साहस के साथ मोर्चा संभालते हुए कहा है कि संविधान पीठ का यह फैसला उसके लिए झटका नहीं है।

संविधान पीठ ने राज्यपाल राजखोवा ने जिस तरह से निर्देश दिया और जिस तरह से उन्होंने राज्य विधानसभा के सत्र को पहले ही बुलाया और उसकी कार्यवाही संचालित की, उनके सभी कार्यों और आदेशों को खारिज कर दिया।

कांग्रेस को तब झटका लगा था, जब उसके 21 विधायकों ने सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी। बीजेपी के 11 विधायकों ने उन बागी विधायकों का साथ दे दिया था। बाद में 14 बागी कांग्रेस विधायक अयोग्य करा दे दिए गए।

राज्यपाल ने राज्य विधासभा का सत्र पहले ही बुला दिया, जिससे विपक्षी विधायकों एवं बागियों ने तुकी को, विधानसभा अध्यक्ष नाबाम रेबिया को एक सामुदायिक केंद्र और एक होटल में चले विधानसभा सत्र में पद से हटा दिया।

साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 60 सीटों में 42 सीटें जीती थीं। पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के तब मात्र पांच विधायक थे, अब कांग्रेस के बागी विधायकों को मिलाकर यह संख्या 30 हो गई है।