‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी में अग्रेजों के जमाने में मनोरंजन के साधन उत्तर भारत में सबसे पहले पहुंच गए थे। शहर में करीब छह सिनेमा हॉल अंग्रेजों ने खोले थे, लेकिन उत्तराखंड राज्य बन जाने के बाद से शहर में सिनेमा का स्वर्णिम काल समाप्त हो गया था।

इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी कहते हैं कि उत्तर भारत का सर्वप्रथम थियेटर मसूरी के लंडौर छावनी में 1860 में स्थापित हुआ था। 1915 से लेकर 1942 तक अंग्रजों ने पिक्चर पैलेस, रिंक सिनेमा, मैजेस्टिक सिनेमा, रियाल्टो सिनेमा हॉल और रॉक्सी सिनेमा हॉल स्थापित कर दिए थे। राज्य बनने के बाद से शहर के सभी सिनेमा हॉल बंद हो गए।

लंबे समय के बाद मसूरी शहर में एक बार फिर से सिनेमा हॉल के खुलने से स्थानीय लोगों के साथ ही उत्तराखंडी फिल्मों से जुड़े लोगों में उत्साह है। फिल्म निर्माता प्रदीप भंडारी कहते हैं कि मसूरी शहर में सिनेमा हॉल खुलने से उत्तराखंडी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के लिए उपयुक्त स्थान मिल जाएगा। शहर में सिनेमा खुलना बड़ी खुशी की बात है।

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सिनेमा हॉल के संचालक रजत अग्रवाल और संदीप साहनी का कहना है कि नया सिनेमा हॉल रिट्ज को आधुनिक तकनीक से बनाया गया है। साउंड, पिक्चर क्लालिटी, सीट व्यवस्था सब कुछ आधुनिक है। मसूरी में लंबे समय से मनोरंजन के कोई साधन नहीं होने से लोगों को सिनेमा देखने के लिए अस्थायी राजधानी देहरादून जाना पड़ता था।

यही नहीं पर्यटकों के लिए भी कोई मनोरंजन के साधन नहीं थे, लेकिन करीब डेढ़ दशक के बाद एक बार फिर 14 जुलाई से मसूरी में सिनेमा का स्वर्णिम युग शुरू होने जा रहा है।