नैनीताल : परम्परागत तरीके से मनेगा हरेला, डीएम रावत ने तैयार की कार्यक्रमों की रूपरेखा

सरकार ने पूरे राज्य में परम्परागत तरीके से बड़ी ही धूमधाम के साथ हरेला त्योहार मनाने के निर्देश दिए हैं। नैनीताल जिले में भी इस साल हरेला पर्व परम्परागत तरीके से मनाया जाएगा। इस पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का निर्धारण डीएम दीपक रावत ने विकास भवन में आयोजित बैठक में किया।

डीएम ने अधिकारियों से कहा कि जिले में हरेला पर्व 16 जुलाई से 16 अगस्त घी-संक्रांत तक आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में वन, उद्यान, शिक्षा, सहकारिता तथा संस्कृति विभाग आपसी समन्वय से सहभागिता निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हरेला, झूमैलो व घी-संक्रांत जैसे पर्वों के माध्यम से प्रकृति की वंदना एवं अपनी परम्पराओं से जुड़ने का संदेश दिया है। हमें इन परम्पराओं को आगे बढ़ाते हुए भावी पीढ़ी को इससे परिचित कराना होगा।

डीएम दीपक रावत ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारम्परिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से धरती का श्रृंगार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग स्कूलों में वृक्षारोपण, झूमैलो व चौमासी लोकगीतों पर आधारित निबन्ध, चित्रकला प्रतियोगिता एवं विचार गोष्ठियों को आयोजन कराए।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक कर्मियों एवं वर्ष मित्रों को आमन्त्रित कर वृक्ष, हरियाली, पर्यावरण व लोक संस्कृति के महत्व की जानकारी भी बच्चों को दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय इस अवसर पर कम से कम 10 तथा अधिक से अधिक 100 पौधों का रोपण करें। आसपास के गांवों को भी इसमें सहभागी बनाया जाए।

स्कूलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में दैवीय आपदा से बचाव की जानकारी को भी शामिल किया जाए। इस कार्यक्रम में जिले के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों की भागेदारी सुनिश्चित की जाए। शुद्ध पर्यावरण एवं हरियाली के प्रतीक हरेला पर्व के प्रति लोगों को जागरुक करने की रैलियों को आयोजन भी किया जाए।

डीएम रावत ने वन विभाग को निर्देश दिया कि वह पर्याप्त मात्रा में वृक्षारोपण हेतु निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे तथा वन विभाग के सभी डिवीजनों व रैंजो में छायाकार, शोभाकार एवं फलदार वृक्ष उपलब्ध कराएं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जंगलों की बाउंड्री तक मेहल, आडू, घिंगारू, अखरोट, मीठा पांगर आदि के पौधे लगाए जाएं।

जंगलों में बड़ी संख्या में बनाए गए ट्रेन्जेज में मंडुवा, झंगौरा के बीजों का छिडकाव किया जाए ताकि जंगली जानवरों को भोजन के लिए जंगल से बाहर न आना पड़े। डीएम रावत ने कहा कि ‘मेरा वृक्ष मेरा धन’ योजना के अन्तर्गत इस साल भी पौधों के रोपण के साथ ही बोनस का भुगतान किया जाएगा।

आकर्षक एवं सुन्दर हरेला उगाने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार चयन हेतु सम्बन्धित ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में एक समिति बनायी जाएगी। चयनित समिति में उप प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, वन पंचायत सदस्य के रूप में रखा जाएगा तथा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, वन आरक्षी, उद्यान व कृषि विभाग अथवा अन्य सम्बन्धित विभाग के ग्राम स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों में से एक अधिकारी/कर्मचारी को सदस्य के रूप में डीएम द्वारा नामित किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि एक माह के इस आयोजन में अन्तिम सप्ताह में घी-संक्रांत के अवसर पर उत्तराखंड के परम्परागत खाद्यान्नों एवं बीजो के संरक्षण हेतु महिला स्वयं सहायता समूहों, सांस्कृतिक दलों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग खाद्यान्न के संरक्षण के साथ ही बीजों का संरक्षण भी करें तथा सहकारिता विभाग के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों एवं महिला मंगल दलों का सहयोग लिया जाए, इसके लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

दीपक रावत ने सामान्य प्रबन्धक कुमायूं मंडल विकास निगम टीएस मर्तोलिया से कहा कि निगम की ओर से उत्तराखंडी व्यंजनों पर आधारित स्टॉल लगाएं तथा निर्धारित मूल्यों पर व्यंजनों की बिक्री की जाए। मुख्य विकास अधिकारी ललित मोहन रयाल ने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि मनरेगा प्रधानमंत्री सड़क योजना, मेरा गांव मेरी सड़क योजना के अन्तर्गत बनाई गई सभी सड़कों के किनारे वृक्षारोपण किया जाए। उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारी धनपत सिंह से कहा कि वह उत्तराखंड के पारम्परिक बीजों के उत्पादन, विपणन, उन्नत प्रजातियों के सम्बन्ध में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियों को आयोजन कराएं।

बैठक में अपर जिलाधिकारी आरडी पालीवाल, संयुक्त मजिस्ट्रेट वन्दना सिंह, उप जिलाधिकारी राकेश तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीसी कांडपाल, उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा के अलावा वन, पंचायत, उद्यान, बाल विकास, शिक्षा महकमों के अधिकारी मौजूद थे।