उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत को 21 और 22 जुलाई को होने वाले राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के तुरंत बाद अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने का सुझाव दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने अस्थायी राजधानी देहरादून में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले काफी समय से राज्य मंत्रिमंडल में रिक्त चल रहे दो पदों को भरने के लिए विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के बाद 23 जुलाई की तिथि उचित है।

हालांकि, सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने दावा किया कि रावत मंत्रिमंडल के विस्तार के पक्ष में नहीं हैं। गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री सुरेंद्र राकेश की मृत्यु से रावत मंत्रिमंडल में एक स्थान खाली हो गया था। इस साल मार्च में नौ अन्य कांग्रेस विधायकों के साथ तत्कालीन कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के सरकार से बगावत करने के कारण मंत्रिमंडल में एक और स्थान खाली हो गया।

इन दोनों मंत्री पदों को भरने को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस विधायकों और संगठन दोनों का मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ रहा है, जो अगले साल की शुरुआत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के मददेनजर इस प्रक्रिया को और न टाले जाने के पक्ष में है।

इस विषय में प्रदेश अध्यक्ष उपाध्याय ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया को जल्द से जल्द अमल में लाया जाए, जिससे विधायकों के साथ ही कार्यकर्ताओं में भी जोश बना रहे।

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री ब्रहमदत्त के पुत्र और विकासनगर से विधायक नवप्रभात और बद्रीनाथ के विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी मंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान से भी इन दोनों को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की मंजूरी मिल गई है। विधानसभा सत्र से पूर्व ही मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही थीं।

हालांकि, सत्र से पहले मंत्रिपदों को भरे जाने से इस दौड़ में पीछे छूटने वाले विधायकों की नाराजगी का खतरा मुख्यमंत्री रावत नहीं लेना चाहते। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सहित कुल 10 विधायकों के बगावती तेवरों के कारण पहले ही काफी मुश्किलें झेल चुके हरीश रावत अब कोई और जोखिम नहीं उठाना चाहते।

राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण डेढ़ महीने तक सत्ता से बेदखल रहे हरीश रावत की सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही बहाल हो पाई थी। फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री रावत को छोड़कर नौ मंत्री हैं और सभी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है।