राज बब्बर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान, अगले साल चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज बब्बर को मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पार्टी ने प्रदेश इकाई में चार वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी बनाए जिनमें इमरान मसूद शामिल हैं। इमरान मसूद ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत भरी जुबान का इस्तेमाल किया था।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में इसका ऐलान किया। आगरा के निकट टुंडला में पैदा हुए बब्बर (64) का ताल्लुक विश्वब्राह्मण समुदाय है। यह समुदाय ओबीसी है। तीन बार लोकसभा सदस्य रहे बब्बर फिलहाल उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य हैं। वह पहले भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।

द्विवेदी ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज बब्बर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है, साथ ही चार वरिष्ठ उपाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है।’ नए वरिष्ठ उपाध्यक्षों में राजाराम पाल (ओबीसी), राजेश मिश्रा (ब्राह्मण), भगवती प्रसाद चौधरी (दलित) और इमरान मसूद (मुस्लिम) शामिल हैं।

इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे निर्मल खत्री को राज्य स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। आजाद ने बाद में कहा कि बब्बर ‘जाति से ऊपर’ हैं और पूरे देश में उनकी अपील है।

सुबह गुलाम नबी आजाद के सोनिया से मुलाकात करने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन में इस बड़े बदलाव का ऐलान किया गया। प्रियंका गांधी ने भी आजाद से एक घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की जिसके बाद यह अटकलने लगने लगीं कि राज्य के चुनाव में वह बड़ी जिम्मेदारी ले सकती हैं।

प्रियंका के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा कि कहा कि चुनाव अभी दूर है और इसकी अभी घोषणा भी नहीं हुई है। बहरहाल, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की मांग रही है कि प्रियंका को राय बरेली और अमेठी से बाहर चुनाव प्रचार करना चाहिए।

मसूद ने पिछले लोकसभा चुनाव में विवादित बयान देते हुए कहा था कि वह ‘मोदी के टुकड़े टुकड़े कर देंगे।’ कांग्रेस राज्य की सत्ता से लंबे समय से दूर है और वह जातिगत राजनीति में सपा और बसपा से पीछे छूट गई।

यह पूछे जाने पर प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में सक्रियता से चुनाव प्रचार करेंगी तो आजाद ने कहा, ‘कांग्रेस से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका है। उनकी पहले से ही भूमिका है और यह उसी तरह जारी रहेगी।’ सुबह के समय प्रियंका से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने सवाल किया, ‘क्या मुलाकात पर कोई रोक है?’ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव में अभी समय है और चीजों को जल्द तय किया जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार होगा, तो आजाद ने कहा कि सामान्य तौर पर यह तब किया जाता है जब कोई निवर्तमान मुख्यमंत्री या पूर्व मुख्यमंत्री होता है।

उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में हमारे पास इस तरह के चेहरे नहीं हैं।’ मसूद के विवादित बयान के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा, ‘अतीत को भूलिए और भविष्य की ओर देखिए।’ उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं ने इससे कहीं ज्यादा घटिया भाषण दिए हैं।

आजाद ने कहा, ‘आप बीजेपी से उनके उन मंत्रियों के बारे में क्यों नहीं पूछते जो नफरत भरी जुबान बोलते हैं?’

राज बब्बर का सफर
अभिनय से राजनीति में कदम रखने वाले बब्बर सबसे पहले 1989 में जनता दल में शामिल हुए और बाद में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 1994 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए। 1999 और 2004 के चुनाव में वह लोकसभा का चुनाव जीते। साल 2006 में सपा से निलंबित किए जाने के बाद 2008 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में फिरोजाबाद लोकसभा सीट से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हराकर फिर लोकसभा पहुंचे। पिछले लोकसभा चुनाव में वह गाजियाबाद से चुनाव हार गए थे।

कांग्रेस प्रवक्ता रहते हुए 2013 में बब्बर ने उस वक्त विवाद खड़ा कर दिया था, जब उन्होंने कहा था कि मुंबई में 12 रुपये में भरपेट खाना मिलता है।

पैसे लेकर सवाल पूछने को लेकर लोकसभा से निलंबित हो चुके हैं राजाराम पाल
राजाराम पाल पहले बसपा में थे और दो बार सांसद बने। पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में 2005 में उनको लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

राजेश मिश्रा का ताल्लुक वाराणसी से है और ब्राह्मण नेता हैं। साल 2004 में वह इस सीट से लोकसभा चुनाव जीते थे। भवगती प्रसाद चौधरी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रमुख हैं। आजाद ने कहा कि प्रचार और समन्वय समिति जैसी समितियों का जल्द गठन किया जाएगा।