मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार जब से राज्य में उत्पन्न सियासी संकट से उबरी है, तभी से पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत निशाने पर हैं। हरक के कई फैसलों को पलटा जा चुका है।

उनके करीबियों की कई जगह हुई तैनाती सरकार समाप्त कर चुकी है। हरीश रावत ने अब शंकरपुर भूमि मामले में जांच बैठा कर सीधे हरक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हरक के अलावा नौ अन्य बागी भी सरकार के निशाने पर हैं, जिसके लिए सरकार उनसे संबंधित मामले भी दिखवा रही है। प्रदीप बत्रा पर एक मुकदमा दर्ज हुआ है, जबकि शैलारानी रावत की रिश्तेदार उपनल से हटा दी गई हैं।

बता दें हरक सिंह रावत सियासी संकट के दौरान हरीश रावत के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर रहे हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत जिस स्टिंग ऑपरेशन के चलते सीबीआई जांच के घेरे में हैं, उसमें भी हरक की ही भूमिका बताई जा रही है।

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मुख्यमंत्री के अलावा हरक सिंह ने हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर खुद मदन बिष्ट का स्टिंग किया। सत्ता में वापसी के बाद सरकार ने हरक सिंह के करीबियों पर निशाना साधा।

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हरक के अलावा बीजेपी में शामिल हुए कुंवर प्रणव चैम्पियन, विजय बहुगुणा, शैलेंद्र मोहन सिंघल, शैला रानी रावत, सुबोध उनियाल, अमृता रावत, सरिता आर्य, प्रदीप बत्रा और उमेश शर्मा काऊ को घेरने के लिए सरकार तैयारी कर रही है।

इनमें से कुछ के खिलाफ पुराने मामले हैं, जिनकी फाइलें भी खुल सकती हैं। रुड़की से विधायक रहे प्रदीप बत्रा के खिलाफ एक कर्मचारी से मारपीट का मुकदमा भी मई में दर्ज हो चुका है। उधर लंढौरा कांड में कुंवर प्रणव चैंपियन की घेराबंदी हुई।