पर्यटन के दृष्टि से वैसे तो सरोवर नगरी नैनीताल में सैलानीयों के लिए एक से बढ़कर एक नजारे हैं। फिर चाहे वह चाइना पीक हो या किलवरी, लड़ियाकांटा, देवपाटा, केमल्स बैक, डेरोथी सीट, टिफिन टॉप, नैनीताल जू, केव गार्डन हों या स्नोव्यू और हनी-बनी हों।

इस बार नैनीताल राजभवन में पर्यटकों की खूब रौनक रही है। इस बार सैलानियों ने राजभवन के दिदार का न सिर्फ रिकॉर्ड कायम किया बल्कि सरकार के खजाने को भी भरा है।

नैनीताल राजभवन के दीदार के लिए सैलानियों की पहली पसंद बना रहा। इस बार इस खूबसूरत इमारत को निहारने के लिए देश-विदेश के पर्यटकों की खूब रौनक देखी गई। इस साल अप्रैल में यहां 1901 बड़े तो 174 बच्चे राजभवन के दर्शन के लिए पहुंचे।

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मई में 3 हजार 700 से ज्यादा पर्यटक पहुचे। जून में 35 सौ से ज्यादा सैलानियों ने राजभवन की चहलकदमी की, इन तीन महिनों में 4 लाख 52 हजार से ज्यादा राजस्व भी पर्यटकों से मिला है। यहां आने वाले पर्यटकों ने इस खूबसूरत इमारत को किसी ने बकिंग्घम पैलेस कहा तो किसी ने इसे दुनिया का अदभुत खजाना।

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गौरतलब है कि नैनीताल का राजभवन गौथिक शैली में निर्मित है, दिल को छूने वाले इस राजभवन में कुदरती खूबसूरती समाई है, चारों तरफ हरियाली, फूलों से सजी क्यारियां व सुन्दर गोल्फ मैदान भी अपनी ओर सैलानियों को खींच लाती हैं।

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1 जून 2001 से शुरू हुए राजभवन दर्शन को 2011 में बंद कर दिया गया, जिसके बाद 2013 में इसे पर्यटन के लिहाज से अहम मानते हुए फिर से सैलानियों के लिए खोल दिया गया।

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इसके बाद 2014 में करीब 20 हजार सैलानी यहां पहुंचे तो 2015 में 13 हजार 700 सैलानियों ने यहां के दीदार किए। अब कुमाऊं मण्डल विकास निगम यहां के लिए गाईड लगाने के साथ इसके इतिहास को भी पर्यटकों को बताने की पहल की जा रही है।

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केएमवीएन के पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा का कहना है की राजभवन दर्शन के लिये राजभवन व केएमवीएन द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं इसके लिए गाईडों को भी लगाया गया है, जो सैलानियों को इसके इतिहास के साथ इसके दिदार करा रहे हैं, वही सैलानियों की संख्या बढ़ाई जाए इसके लिए भी केएमवीएन और कोशिश कर रहा है।