सीबीआई ने अस्थायी राजधानी देहरादून में रायपुर स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला आईआरडीई में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल भरत जोशी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह रिश्वत ठेकेदार से बकाया करीब 16 लाख रुपये के भुगतान के बदले मांगी गई थी।

लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी आईआरडीई में गैरीसन इंजीनियर्स की रिसर्च एंड डेवलेपमेंट विंग में तैनात थे। सीबीआई टीम ने जोशी के ऑफिस और विज्ञान विहार स्थित आवास पर गहन तलाशी कर कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। देर रात तक सीबीआई की कार्रवाई चल रही थी।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक आईआरडीई में निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार हरेंद्र का करीब 16 लाख रुपये का भुगतान बकाया था। काफी कोशिशों के बाद भी भुगतान नहीं हो पा रहा था।

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आरोप है कि लेफ्टिनेंट कर्नल भरत जोशी निवासी पौड़ी गढ़वाल ने भुगतान के लिए रिश्वत की मांग की। लेफ्टिनेंट कर्नल और ठेकेदार में बकाया भुगतान के लिए 38 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। ठेकेदार ने 10 हजार रुपये की पहली किस्त पांच दिन पहले उपलब्ध करा दी।

सैन्य अफसर ने दो दिन पहले फिर 10 हजार रुपये की मांग की तो ठेकेदार ने सीबीआई में शिकायत दर्ज करा दी। सीबीआई अधिकारियों ने सत्यापन के बाद ट्रेप टीम का गठन किया। सीबीआई टीम ने शुक्रवार शाम को लेफ्टिनेंट कर्नल भरत जोशी को उनके दफ्तर में ठेकेदार से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। हिरासत में लेकर सैन्य अफसर जोशी से कई घंटे तक पूछताछ की गई।

इसी बीच सीबीआई के एसपी सुजीत कुमार और डीएसपी अखिल कौशिक यहां पहुंच गए। कार्रवाई की जानकारी लेने के बाद सीबीआई अधिकारी वापस लौट गए। टीम ने ऑफिस में सघन तलाशी के बाद कई फाइलें जब्त कर लीं।

बाद में जोशी के विज्ञान विहार स्थित आवास पर छापेमारी हुई, जो देर रात तक चलती रही। सीबीआई की टीम में डीएसपी बीएस चौहान, आईएम नेगी, इंस्पेक्टर तेज प्रकाश देवरानी, सुनील लखेड़ा, एसएच नयाल, आरपी शर्मा, कांस्टेबल राम सिंह और जोगेंद्र आदि शामिल रहे। बता दें कि उत्तराखंड में पहली बार लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक का अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा गया है।