मुस्लिम उपदेशक जाकिर नाईक को साल 2012 में ‘शांति दूत’ करार देने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि अगर बांग्लादेश या भारत सरकार को नाईक और इस्लामिक आतंकवादी समूहों के बीच संबंधों को लेकर कोई भी सबूत मिलता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

ढाका के एक मशहूर कैफे में एक जुलाई को आतंकवादी हमले के बाद खुलासा हुआ है कि दो हमलावरों ने नाईक के भाषणों से हमले की प्रेरणा ली थी, जिसके बाद से ही नाईक संदेह के घेरे में हैं।

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘अगर भारत सरकार या बांग्लादेश सरकार के पास जाकिर नाईक के इस्लामिक स्टेट (आईएस) के साथ संबंधों को लेकर कोई भी सबूत है, तो उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’

दिग्गी राजा का यह ट्वीट ऑनलाइन जारी उस वीडियो के बाद आया है, जिसमें दिग्विजय एक मंच पर नाईक से गले मिलते दिख रहे हैं और साल 2012 में एक सम्मेलन में उन्हें ‘शांति दूत’ करार दे रहे हैं।

विवादित वीडियो में मुस्लिम उपदेशक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने कई बार जाकिर नाईक का नाम सुना है। मैं इस बात से खुश हूं कि वे (नाईक) शांति का संदेश पूरी दुनिया में पहुंचा रहे हैं।’

वीडियो का प्रसारण पीस टेलीविजन द्वारा किया गया, जिसका संचालन नाईक करते हैं। विवाद का संदर्भ देते हुए दिग्विजय ने ट्वीट में दावा किया कि सम्मेलन सांप्रदायिक सौहार्द और आतंकवाद के खिलाफ था।

एक समारोह में नाईक के साथ अपनी उपस्थिति का बचाव करते हुए दिग्गी राजा ने ट्वीट किया, ‘सम्मेलन में मेरे भाषण का आयोजन जाकिर नाईक ने किया था, जैसा कि दिख रहा है। मैंने धार्मिक कट्टरवाद व सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ बोला था।’


गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा था कि नाइक का भाषण हमारे लिए चिंता का विषय है और सरकारी एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि नाईक का भाषण आपत्तिजनक है और सरकार द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई का संकेत दिया। नायडू ने कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्रालय हर चीज का विश्लेषण करेगा।’

मुंबई में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक नाईक पर अन्य धर्मों को निशाना बनाकर नफरत भरे भाषणों को लेकर ब्रिटेन व कनाडा में प्रतिबंध हैं।