इनकी चली तो, ये जनाब पंचवर्षीय योजनाएं बनाकर पहाड़ खाली करा देंगे…

बेइंतेहां पलायन से पहाड़ के गांव लगातार खाली होते जा रहे हैं। पलायन से खाली होते पहाड़ों की समस्या का तोड़ ढूंढने की भरसक कोशिश प्रदेश सरकार भी कर रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस के ही श्रीनगर विधायक व संसदीय सचिव ने नदी और जंगलों की कीमत पर ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वहां से हटाने का बेतुका बयान दिया है।

संसदीय सचिव व श्रीनगर विधायक के साथ बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पद को संभाल रहे गणेश गोदियाल ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना के पानी से फायदा उठा रही राज्य सरकारों को केन्द्र सरकार बाध्यकारी आदेश जारी करे कि तय सीमा के अंदर पहाड़ों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों को धीरे-धीरे खाली करते हुए बस्तियों को निचले क्षेत्रों में स्थापित किया जाए।

श्रीनगर गढ़वाल में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 3 स्नानघाट परियोजनाओं के शिलान्यास के बाद उन्होंने ये बात कही। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पंचवर्षीय योजना के तहत इसे लागू किया जाए, जिसके तहत पहली पंचवर्षीय योजना में 1800 मीटर से ऊपर के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का सैटलमैंट किया जाए।

उन्होंने कहा, इसी तरह दूसरी पंचवर्षीय योजना में 1700 और फिर 1600 मीटर और इसके साथ एक तय सीमा तक हम बस्तियों को निचले क्षेत्रों में सैटल करें। उन्होंने कहा कि इससे खाली होने वाले स्थानों पर जंगलों को पनपने का मौका मिलेगा और इससे गंगा की सहायक नदियों का जलस्तर भी कम नहीं होगा।

पहाड़ों से हो रहे पलायन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ों से हो रहा 70 फीसदी पलायन सुख का है न कि मजबूरी का, क्योंकि मैदानी इलाकों में अच्छा जीवनस्तर होने के कारण लोग पलायन कर रहे हैं। खाली होते पहाड़ों पर उनका कहना है कि इतिहास को उठाकर देखें तो कुदरत का एक नियम होता है, खाली कुछ नहीं होता। अगर एक चीज खाली हुई तो दूसरी चीज वहां पर आ जाती है।

उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधन और लोगों के मन की इच्छा का आपस में संघर्ष हो रहा है। गोदियाल ने कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार अगर सड़क बना रही है तो उस सड़क को बनाने वाला स्थानीय ठेकेदार ठेके में मुनाफा कमाते ही मैदानी क्षेत्रों में जमीन खरीदकर अपना सैटलमेंट कर रहा है।