नैनीताल : एक साल से परेशान ग्रामीणों का ऐलान, इस बार मतदान नहीं करेंगे

सांकेतिक तस्वीर

‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी। नैनीताल के एक गांव की समस्या पर यह कहावत बिल्कुल सच साबित हो रही है। शहर से चंद किलोमीटर दूर नगर पालिका सीमा में आने वाले इस गांव में भारी बारिश के चलते आया मलबा लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। लेकिन गांव तक सरकारी मदद सिर्फ आश्वासन तक ही सिमट कर रह गई है।

नारायणनगर के लोग इन दिनों सहमे हुए हैं। सालभर पहले बादल फटने की घटना उन्हें हर साल बारिश के समय डराती है। दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश से एक बार फिर मलबा लोगों के घरों में घुस गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की गई है।

तकरीबन आधा दर्जन घरों को खतरे की जद में मानते हुए लाल निशान लगाकर चिन्हित कर दिया गया है, लेकिन मलबा हटाने और मुसीबत बने गदेरे का कोई हल नहीं निकाला जा सका है।

ग्रामीण सुनील कुमार के घर में भी लाल निशान लगा है। वह घर छोड़कर दूसरी जगह रह रहे हैं। सुनील का कहना है कि घर में मलबा घुस गया है, बारिश का पानी मुसीबत बना रहता है, लेकिन कोई मदद नहीं मिली है।

गांव के ही हरिश्चन्द्र कहते हैं अब हमने मन बना लिया है कि गांववालों की समस्या का समाधान न हुआ तो विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे।

जानकारी के मुताबिक पानी का बहाव कम करने के लिए चेक डैम बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका है, लेकिन महज चार डैम बनाकर खानापूर्ति कर दी गई है। बार-बार शिकायत के बावजूद नगर-पालिका के लोग घरों से मलबा हटाने नहीं पहुंचे हैं। नाले मलबे से भरे हैं और बारिश का पानी घरों में घुस रहा है।

गांववालों के गंभीर आरोपों के बीच अधिकारी अपना अलग तर्क दे रहे हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत का कहना है कि गांव से ऊपर पहाड़ी का हिस्सा बेहद स्लाईडिंग है, जिससे मलबा घरों तक आ जाता है। स्थाई समाधान के लिए तकरीबन पच्चीस लाख के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव नगर-पालिका की ओर से सरकार को भेजा जा चुका है। मलबा हटाने के लिए भी बजट मंजूर कर दिया गया है।

फिलहाल हालत यह है कि गांव के लोग फरियाद करते-करते थक गए हैं और अब गुस्से में वोटिंग का बहिष्कार करने का भी ऐलान कर दिया हैं, लेकिन सवाल यह है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांववालों की समस्या पर गंभीर क्यों नहीं हैं?