अभी तक कागजों और ‌निरीक्षण के दौर से गुजर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन कार्यक्रम ‘नमा‌मि गंगे’ की लॉंचिंग तीर्थनगरी हरिद्वार से हो गई। हरिद्वार में नितिन गडकरी और उमा भारती ने नमामि गंगे के तहत 43 योजनाओं की शुरुआत की।

नमामि गंगे की शुरुआत के साथ केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि हम ये योजना लांच करके मां गंगा पर अहसान नहीं कर रहे हैं, बल्कि पाप का प्रायश्चित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से मां गंगा को ये छोटी सी भेंट दी जा रही है।

लॉंचिंग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती का स्वागत किया। नमा‌मि गंगे की लॉंचिंग के मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उमा भारती और शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, विधायक मदन कौशिक, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, संजय गुप्ता, स्वामी य‌तीश्वरानंद, प्रेमचंद अग्रवाल, विजय बर्थवाल, चंदर शेखर भट्टेवाले, महा मंडलेश्वर ‌हरि चेतनानंद, सतपाल ब्रह्मचारी, मेयर मनोज गर्ग, अमन शर्मा, संजय चतुर्वेदी मौजूद रहे।

गुरुवार को पूरे देश में गंगा की निर्मलता से जुड़ी 208 योजनाओं का अलग-अलग स्थानों पर शिलान्यास और लोकार्पण होगा। हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में इसके लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां हरिद्वार और ऋषिकेश से जुड़ी करीब 43 योजनाओं की शुरुआत की गई।

समारोह का आयोजन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत उत्तराखंड में कार्य करने वाली संस्था वेबकोस की ओर से किया जा रहा है। नेशल मिशन फॉर गंगा के निदेशक प्रवीण कुमार और समन्वयक संजय चतुर्वेदी ने बताया कि नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत चार तरह के कार्य करके गंगा को स्वच्छ बनाया जाना है।

इनमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवरेज नेटवर्क विकसित करना, गंगा के किनारे घाट बनाना और शवदाह गृह बनाया जाना शामिल है। नमामि गंगे के तहत गुरुवार को होने वाले समारोह में जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा है, उनमें हरिद्वार के हिस्से में अभी कोई खास योजना नहीं आई है। एक स्नान घाट के अलावा छह श्मशानघाट बनाए जा रहे हैं।

हरिद्वार में गंगा को सबसे ज्यादा गंदे नाले प्रदूषित कर रहे हैं। उत्तरी हरिद्वार से पुल जटवाड़ा तक कुल आठ बड़े नालों के साथ ही कई छोटे नाले भी गंगा में गिर रहे हैं। योजना के पहले चरण में इन गंदे नालों का ट्रीटमेंट किया जाना फिलहाल शामिल नहीं है। निदेशक प्रवीण कुमार ने बताया कि अगले चरण में नालों को गंगा में गिरने से बचाने की भी योजना है।