अल्मोड़ा : सालों से विस्थापन की बाट जोह रहे हैं 242 गांव, हर बार आश्वासन ही मिला

अल्मोड़ा जिले में आपदा प्रभावित गांव के लोग विस्थापन के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। जिले के 142 परिवार पिछले कई सालों से आपदा से प्रभावित हैं। कुछ परिवार कई सालों तक टैंटों में रह रहे हैं तो कुछ सरकारी भवनों में आपना आशियाना बनाए हुए हैं। प्रशासन अब विस्थापन को दो चरणों में करने की तैयारी कर रहा है।

अल्मोड़ा जिला वीवीआईपी जिले के नाम से जाना जाता हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत का गृह जिला, स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा इसी जिले से आते हैं।

जिले के 242 परिवारों के विस्थापन का मामला पिछले कई सालों से लटका पड़ा है। राज्य व केन्द्र सरकार एक दूसरे को बजट का बहाना बनाकर राजनीति कर रहे हैं। राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा भी मानते हैं कि प्रभावितों का जल्दी से विस्थापन होना चाहिए। जिलाधिकारी दो चरणों में विस्थापन करने की बात कर रहे हैं।

अल्मोड़ा जिले के रानीखेत, सल्ट, चौखुटिया और भैसियाछाना में ब्लॉकों के 242 परिवारों का विस्थापन होना है, ग्रामीणों को जनप्रतिनिधि और शासन के प्रतिनिधि कई बार आश्वासन दे चुके हैं। जब भी चुनाव आते हैं लोगों को विस्थापन का आश्वासन दिया जाता है लेकिन चुनाव बाद फिर वही ढाक के तीन पात।

जब राज्य के किसी गांव में आपदा से गांव उजड़ जाते हैं तब सरकार के प्रतिनिधि कहते हैं कि गांवों का विस्थापन किया जाएगा। जब सालों से विस्थापन होने वाले गांवों की सूची शासन में लंबित हैं तो प्रभावित गांवों को जल्दी विस्थापित क्यों नहीं किया जाता। क्या इस बार भी पिछले सालों की तरह बजट को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को राजनीति करेंगे या फिर प्रभावितों को विस्थापित किया जाएगा।