देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए 69 साल गुजर चुके हैं। बावजूद इसके आज भी उत्तराखंड के पौड़ी जिले में ऐसा गांव हैं, जहां के लोगों ने आज तक बिजली नहीं देखी है। सुनने में भले ही यह अटपटा सा लग रहा हो, लेकिन यह सच है।

इस क्षेत्र का नेतृत्व एक तत्कालीन मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं। ऐसा भी नहीं है कि अपने परिवार के बेहतर कल के लिए ग्रामीणों ने अपने चुने जनप्रतिनिधियों और सरकारी नुमाइंदों से इसकी शिकायत न की हो, लेकिन लकवाग्रस्त हो चुके तंत्र की नाकामी तो देखिए कि चन्द्रयान और मंगल पर उपग्रह भेजने की बात करने वाले इस देश के दूरस्थ गांव आज भी अंधकार में हैं।

आजादी के 69 साल के बाद भी विकास की रफ्तार को लैंसडाउन विधानसभा के दूरस्थ इलाके में आईना दिखाता गांव टाडियो भी है। सड़क मार्ग से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थिति यह गांव न केवल सरकारी तंत्र की नाकामी उजागर कर रहा है, बल्कि यहां के जनप्रतिनिधियों के चुनावी दावों की पोल भी खोल रहा है।

देश की आजादी के 69 साल का समय गुजर जाने के बावजूद टाडियो गांव आज भी अंधकार में जीने को मजबूर है। हालांकि इस गांव के आसपास के इलाकों में बहुत पहले ही बिजली पहुंचा दी गई थी, लेकिन इस गांव का दुर्भाग्य, देखिए कि आज तक यहां के ग्रामीणों को बिजली की सुविधा से वंचित रखा गया है। यह सब कुछ उस राज्य के गांव की हकीकत है, जिसे ऊर्जा प्रदेश कहा जाता है और जहां टिहरी डैम जैसा बड़ा बांध है।

विषम भौगोलिक क्षेत्रफल वाली वीवीआईपी लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की कमान सम्भालने वाले भुवनचंद खंडूडी भी इसी क्षेत्र से जीतकर राज्य विधानसभा पहुंचे थे। लेकिन इसके बावजूद आज तक भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंच पाई है। यहां के स्थानीय बीजेपी विधायक का कहना है कि जल्द ही गांव में बिजली पहुंचा दी जाएगी।