मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में डॉक्टरों ने विशेष प्लास्टिक सर्जरी के जरिए 12 वर्षीय लड़के के माथे पर कृत्रिम नाक उगा दी। यही नहीं इसके बाद उसे उसकी वास्तविक जगह पर प्रत्यारोपित करने का कारनामा भी कर दिखाया।

इस कामयाब ऑपरेशन के अगुवा डॉ. अश्विनी दास ने बताया कि नजदीकी उज्जैन जिले के 12 वर्षीय अरुण पटेल की नाक 12 साल पहले एक इंजेक्शन के कुप्रभाव के कारण गल गई थी। उस समय उसकी उम्र केवल एक महीना थी।

42 वर्षीय प्लास्टिक सर्जन ने कहा, ‘अरुण के चेहरे पर सामान्य राइनोप्लास्टी (नाक की प्लास्टिक सर्जरी) संभव नहीं थी, क्योंकि उसके चेहरे से नाक लगभग गायब हो गई थी। इसलिए हमने उसकी विशेष प्लास्टिक सर्जरी करने का फैसला किया, जिसे मेडिकल जुबान में प्री-फैब्रिकेटेड फोरहेड फ्लैप राइनोप्लास्टी कहा जाता है।’

दास ने बताया कि इस सर्जरी के पहले चरण में अरुण के माथे पर जगह बनाकर सिलिकॉन की विशेष थैली (टिश्यू एक्सपैंडर) स्थापित की गई। फिर इसमें विशेष द्रव्य डालकर इसे फुलाया गया, ताकि माथे के टिश्यू फैल सकें। इस थली ने तीन महीने में फैलते हुए माथे पर खाली स्थान तैयार किया।

दास ने बताया कि सर्जरी के दूसरे चरण में अरुण के सीने के निचले हिस्से से कार्टिलेज (उपास्थि) निकाली गई, जिससे उसके चेहरे की संरचना के अनुरूप कृत्रिम नाक तैयार की गई। इसे माथे पर बनाई गई खाली जगह में प्रत्यारोपित करने के बाद तीन महीने तक रखा गया ताकि किसी सामान्य अंग की तरह उसमें रक्त प्रवाह शुरू हो सके और उसके सारे उतक (टिश्यू) जीवित होकर एक जैसा कार्य करने लगें।

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उन्होंने बताया कि सर्जरी के तीसरे चरण के तहत अरुण के माथे पर विकसित कृत्रिम नाक निकाली गई। फिर इसे उसके चेहरे पर नाक के वास्तविक स्थान पर प्रत्यारोपित किया गया, जहां उसे हर बारीक से बारीक नस के साथ जोड़ा गया ताकि इसमें सामान्य नाक की तरह रक्त प्रवाह हो सके। सर्जरी के चौथे चरण में लड़के के माथे की उस जगह को दुरुस्त किया गया, जहां कृत्रिम नाक उगाई गई थी।

बहरहाल, इन दिनों अरुण अपने चेहरे पर नई नाक लगाए जाने से बेहद खुश है। कक्षा छह के छात्र ने कहा, ‘चेहरे पर नाक नहीं होने से मैं शीशे में खुद को देखने की हिम्मत नहीं कर पाता था। मैं सड़क पर हमेशा सिर झुका कर चलता था। स्कूल में बच्चे मुझसे डरते थे और मेरा मजाक उड़ाते थे। चेहरे पर नई नाक लगने के बाद अब मैं आत्मविश्वास के साथ लोगों का सामना कर सकता हूं।’