भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों और उत्तराखंड बीजेपी के दिग्गज नेताओं को पछाड़ते हुए अजय टम्टा को पीएम मोदी की कैबिनेट में शामिल किया गया है। जिला पंचायत सदस्य से राजनीति की शुरुआत कर राष्ट्रीय कैबिनेट तक पहुंचने वाले अजय टम्टा का सफर अपने आप में उल्लेखनीय और कुछ-कुछ राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता हरीश रावत से मिलता-जुलता है।

अजय टम्टा उत्तराखंड में बीजेपी के युवा चेहरे के साथ-साथ दलित नेता के रूप में उभर कर सामने आएं हैं। टम्टा बीजेपी संगठन में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अल्मोड़ा जिले के दुगालखोला के एक दलित परिवार में 16 जुलाई, 1972 को जन्मे टम्टा के राजनीतिक सफर की शुरुआत जिला पंचायत सदस्य के रूप में हुई।

अजय टम्टा ने सबसे पहले जिले के तल्ला तिखून से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद टम्टा 1996 में जिलापंचायत उपाध्यक्ष बने। इसके साथ ही उन्होंने जिला पंचायत में कार्यवाहक अध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया।

साल 2002 में सोमेश्वर से बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर टम्टा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2007 में विधानसभा चुनाव में टम्टा को बीजेपी ने टिकट दिया। विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर अजय टम्टा खंडूरी कैबिनेट में राज्य और कैबिनेट मंत्री बने। 2009 में टम्टा को लोकसभा का टिकट तो मिला, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2012 में टम्टा एक बार फिर विधायक बने। बीजेपी ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीटी से उन्हें 2014 में लोकसभा टिकट दिया और उन्होंने अपने विराधी कांग्रेस के प्रदीप टम्टा को हराकर जीत दर्ज की। बता दें कि हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में प्रदीप टम्टा को उत्तराखंड से राज्यसभा भेजा गया है।

गौरतलब है अजय टम्टा के इससे पहले भी मोदी कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन ऐन वक्त पर किन्हीं कारणों से उनका नाम शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची से हटा दिया गया था। जिस तरह से उत्तराखंड में पौड़ी से सांसद बीसी खंडूरी, नैनीताल से सांसद भगत सिंह कोश्यारी और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को पछाड़ कर अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा को मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है, उससे अजय टम्टा का कद बढ़ना लाजमी है।

अजय टम्टा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देकर बीजेपी ने न सिर्फ उत्तराखंड को प्रतिनिधित्व दिया है बल्कि राज्य के दलित समुदाय को प्रतिनिधित्व देने का संदेश भी दिया है।