बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले पर मशहूर लेखिका तस्‍लीमा नसरीन ने कहा कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद करें। इसके साथ ही उन्होंने इस तर्क को भी खारिज किया कि गरीबी किसी को आतंकवादी बना देती है।

हमले को अंजाम देने वाले हमलावर पढ़े-लिखे और समृद्ध परिवार से वास्ता रखने वाले थे। कई ट्वीट करते हुए तस्लीमा ने सलीम समद का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश का वैश्विक आतंक में बड़ा योगदान रहा है।

 

तस्‍लीमा कई बार इस्‍लाम को लेकर कड़ी टिप्‍पणियां कर चुकी हैं। इसके चलते बांग्‍लादेश और भारत में उन्‍हें मुसलमानों के हमले भी झेलने पड़े हैं। तस्‍लीमा ने 1994 में बांग्‍लादेश छोड़ दिया था। उन्‍हें अल कायदा जैसे आतंकी संगठन से जान से मारने की धमकी मिल चुकी है।

हमलावरों ने अल्‍लाहू अकबर का नारा लगाया, उन्‍हें इस्‍लामी आतंकी कहना चाहिए
इससे पहले तस्‍लीमा नसरीन ने शेख हसीना सरकार पर हमला बोला है। उन्‍होंने पीएम शेख हसीना पर निशाना साधते हुए कहा कि ढाका हमलों के लिए आईएसआईएस ने जिम्‍मेदारी ली है, लेकिन पीएम का कहना है कि बांग्‍लादेश में इस आतंकी संगठन का कोई वजूद नहीं है। उन्‍होंने टि्वटर के जरिए यह हमला बोला।

उन्‍होंने हमलावरों के संबोधन के मुद्दे पर कहा कि उन्‍हें इस्‍लामी आतंकी क्‍यों नहीं कहा जा रहा है। तस्‍लीमा ने लिखा, ‘मीडिया उन्‍हें गनमैन लिख रहा है। लेकिन उन्‍होंने लोगों को मारने और उनमें दहशत फैलाने से पहले अल्‍लाहू अकबर का नारा लगाया। क्‍या उन्‍हें इस्‍लामी आतंकी नहीं कहा जाना चाहिए था?’

तस्‍लीमा ने घटना को खत्‍म करने में लगे वक्‍त पर भी सवाल उठाए। उन्‍होंने लिखा, ‘पुलिस, रैपिड एक्‍शन बटालियन, सेना, बॉर्डर गार्ड बांग्‍लादेश, नेवी सभी आठ आतंकियों से लड़ने के लिए आ गए। छह घंटे हो चुके हैं अभी तक हल नहीं निकला।’