चमोली-पिथौरागढ़ : 36 घंटे बाद भी मलबे में दबे कई लोग अब भी लापता

कहीं तेज तो कहीं रुक-रुककर हो रही बरसात के बीच शनिवार को चमोली और पिथौरागढ़ के आपदाग्रस्त इलाकों के मलबों में से 14 शव निकाले जा सके। इस तरह बादल फटने से हुई तबाही में मरने वालों की संख्या 35 से ज्यादा हो गई है। मौसम की मार से राहत कार्य बार-बार प्रभावित होता रहा, नतीजतन अपना सब कुछ झोंक देने के बावजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, एसएसबी समेत दर्जन भर राहत एजेंसियां मिलकर भी शुक्रवार को लापता हुए 21 जनों को तलाश नहीं पाईं। अच्छी बात यह रही कि शनिवार को मौसम ने शुक्रवार जैसा रौद्र रूप नहीं दिखाया, लिहाजा कहीं से भी बड़ी जनहानि की घटना का खबर नहीं मिली।

इधर, भारी तबाही के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राहत कार्यों की कमान खुद अपने हाथों में ले ली। उन्होंने शनिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ आपात बैठक कर आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की और अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने चारधाम यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए सभी आवश्यक कदम तत्काल उठाने के निर्देश दिए, ताकि आपदा का यात्रा पर कोई असर न पड़े।

बता दें कि राज्य के पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में गुरुवार और शुक्रवार की रात सिंगाली, दाफीला, बस्तड़ी, डीडीहाट सहित कई स्थानों पर एकसाथ बादल फटने से भारी तबाही हुई। प्राकृतिक आपदा में जहां 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं, वहीं 10 से ज्यादा लोग अभी तक लापता हैं।

इसके अलावा प्राकृतिक आपदा के चलते बड़े पैमाने पर मवेशियों की मौतें होने के साथ ही सैकड़ों की संख्या में मकान जमींदोज हो गए हैं। दोनों जिलों में हजारों लोगों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चमोली जिले में शनिवार को भी जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। घाट कस्बे के पुराने बाजार में एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम घूनी गांव के रामचंद्र और उनके पोते योगेश्वर प्रसाद की खोजबीन में लगी रही। जबकि जाखणी गांव में खोज-बचाव का काम शुरू ही नहीं हो पाया।

चमोली के जाखणीं गांव में शाम पांच बजे से रिमझिम बारिश भी शुरू हो गई। इससे आपदा बचाव कार्य में दिक्कतें आईं। शुक्रवार सुबह पांच बजे जाखणी गांव के जेठी गदेरे में बादल फटने से छानियां बह गई थीं। शनिवार को पांच बजे, 36 घंटे बाद भी जाखणी गांव में खोज-बचाव शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, सबसे महत्वपूर्ण बद्रीनाथ हाईवे, घाट-नंदप्रयाग और चमोली-ऊखीमठ सड़कों के अवरुद्ध होने से गोपेश्वर, घाट, पीपलकोटी, जोशीमठ और पोखरी क्षेत्रों में शनिवार को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पाई। बद्रीनाथ हाईवे को खोलने में भी बीआरओ को काफी मुश्किलें आ रही हैं।