उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और चमोली में बादल फटने से हुई तबाही ने राज्य के आपदा प्रबंधन की कलई खोल दी है। मानसून की दस्तक के साथ ही बादल फटने हुई भारी तबाही के चलते आपदा पीड़ित घंटों कराहते रहे लेकिन आपदा के कई घंटे बाद तक पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिल पाई।

भारी बारिश के चलते सड़कों के टूट जाने से जहां एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी की राहत टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पडी, वहीं मौसम की खराबी के चलते धारचूला से हेलीकॉप्टरों की उड़ान भी नहीं हो सकी।

ऐसा होने से राहत कार्य काफी देर से शुरू हो पाए। आखिरकार जैसे-तैसे राहत टीमों में शामिल अधिकारी, राहतकर्मी घटनास्थलों पर पहुंचे और राहत अभियानों को शुरू किया गया।

धारचूला से भी हेलीकॉप्टर तब उड़ान भर पाए जब मौसम में थोड़ा बदलाव आया। उसके बाद घटनास्थल से गंभीर घायलों को हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ व मिर्थी लाया गया। दूसरी ओर आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सचिवालय परिसर में स्थापित किए गए कंट्रोल रूम को भी सूचनाएं लेने-देने में भी भारी परेशानियां उठानी पड़ी।

आपदा के चलते संचार व्यवस्था चरमरा जाने से सूचनाओं के आदान प्रदान में दिक्कतें हुई। कंट्रोल रूप में उपस्थित आपदा सचिव शैलेश बगौली, अपर सचिव सी. रविशंकर समेत शासन के आला अफसरों को सूचनाएं लेने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।