शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड के कई जिलों में तेज बारिश से जन जीवन प्रभावित हो गया है। जहां अस्थायी राजधानी देहरादून में गुरुवार रात से हो रही तेज बारिश से मौसम सुहावना हो गया, वहीं गढ़वाल और कुमाऊं के पहाड़ी इलाकों में बारिश ने तबाही मचा दी है।

उत्तराखंड में 72 घंटे में भारी बारिश के अलर्ट के बाद चमोली और पिथौरागढ़ जिले में बादलों ने तबाही मचा दी है। पिथौरागढ़ के ‌बस्तड़ी और नौलेरा गांव में बादल फटने की घटना में 13 लोगों की जानें चली गईं और 25 लोगों की लापता होने की आशंका जताई जा रही है। जिले में आठ घरों के तबाह होने की भी खबर है। राहत बचाव कार्य के लिए सेना को बुलाया गया है।

पिथौरागढ़ और चमोली में मची तबाही को लेकर देहरादून में पुलिस और एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की टीम भेजी गई है। पुलिस को मिले आंकड़े के मुताबिक दोनों जिलों में हुई घटनाओं में 11 लोगों के मरने की खबर है।

एसओ अस्कोट के नेतृत्व राजस्व और पुलिस टीम और धारचूला से सेना के जवान बचाव कार्य में लगे हैं। दोपहर दो बजे तक यहां मलबे से तीन शव मलबे से निकाले गए। मरने वालों के नाम गिरीश चंद्र भट्ट, माधवानंद, रेवाधर शामिल हैं।

मलबे से दो घायलों को निकाला गया, जिनकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज के लिए देहरादून ले जाने को हेलीकॉप्टर मंगाया गया। अब भी मलबे में 20-25 लोगों के दबे होने की आशंका है। जिले और आपदा क्षेत्र की संचार सेवाएं ठप गई हैं। ओगला-सिंगाली-भागिचौरा मार्ग दो स्थानों पर 30-40 मीटर बह चुका है और पथरकोट गांव में भी एक मकान ढहने की सूचना है।

मुख्यमंत्री ने की मुआवजे की घोषणा
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पहाड़ी इलाकों में बारिश होने के चलते अलकनंदा, मंदाकिनी, गंगा, सरयू और गोमती सहित करीब एक दर्जन नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित कई हाईवे बंद हो गए हैं। मसूरी से थल जाने वाले रास्ते पर भी सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं। केदारनाथ और यमुनोत्री हाईवे पर भी हजारों लोग फंसे हैं।

गुरुवार देर रात से अस्थायी राजधानी देहरादून में भी रुक-रुक कर बारिश हो रही है। जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हल्‍द्वानी, काशीपुर, अल्मोड़ा, ऋषिकेश और कोटद्वार में गुरुवार रात से रुक-रुक बारिश का दौर जारी है। अल्मोड़ा में शुक्रवार सुबह से लगातार बारिश जारी है। जिससे जन जीवन प्रभावित हो रहा है।

शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे चमोली में घाट ब्लॉक के जाखड़ी गांव में बादल फटने से चीख पुकार मच गई। बादल फटने की घटना के बाद गांव के चार लोग के लापता हो गए। दसोली ब्लॉक के ‌‌सिरों गांव के बीच से बहने वाले गदेरे में ऊफान आने से दो लोग बह गए। इनके शव बरामद किए जा चुके हैं।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे बंद
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भारी बारिश के कारण ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर तोता घाटी के पास नेशनल हाईवे पर चट्टान आ गिरी, जिससे हाईवे बंद हो गया है। बागेश्वर में सरयू और गोमती का जलस्तर काफी बढ़ गया है। नैनीताल में रात से रुक-रुककर बारिश हो रही है। मलबा आने से कई जगहों पर बद्रीनाथ हाईवे बंद पड़ा है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, चमोली और पिथौरागढ़ में बादल फटने की घटना बेहद दुखद हादसा है। प्रभावित जगहों पर आपदा प्रबंधन टीम को भेजा जा चुका है। मैं और मुख्य ‌सचिव खुद घटना को मॉनिटर कर रहे हैं। मृतकों के परिजनों को सरकार की ओर से दो-दो लाख का मुआवजा दिया जाएगा।

मौसम विभाग ने देहरादून सहित आठ जिलों में शुक्रवार से आगामी 72 घंटे भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बाकी जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की आशंका जताई है।

लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
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मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत, अल्मोड़ा, पौड़ी, हरिद्वार, देहरादून और टिहरी जिले में भारी से भी भारी बारिश हो सकती है। एक जुलाई से अगले 72 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की गई है।

मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चंपावत में आगामी 24 घंटे भारी बारिश और इसके बाद भारी से भी भारी बारिश हो सकती है। देहरादून में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे।

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कई जगहों पर भारी बारिश होने से तापमान में तीन से पांच डिग्री तक की गिरावट आ सकती है। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

राज्यपाल ने जताया दुख
गुरुवार रात से पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में हो रही भारी बारिश के कारण जान-माल की क्षति पर राज्यपाल डॉ. कृष्ण कान्त पॉल ने गहरा दुःख और चिंता व्यक्त की है। उन्हें उम्मीद है क़ि आपदा प्रबंधन की पूर्व तैयारियों के अनुरूप प्रभावित क्षेत्रो में यथाशीघ्र अपेक्षित राहत पहुंचेगी।

राज्यपाल ने कहा है क़ि आपदा प्रबंधन से सम्बंधित सभी वरिष्ठ अधिकारी स्वयं बचाव एवं राहत कार्यों को देखें। मानसून की शुरुआत में उत्पन्न इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।