उत्तराखंड का बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में भी केन्द्र से 90:10 अनुपात में वित्तपोषण का आग्रह

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली से बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में भी केंद्र प्रायोजित योजनाओं की भांति 90:10 के अनुपात में वित्तीय प्रावधान लागू करने का आग्रह किया है।
वित्त मंत्री अरण जेटली से नयी दिल्ली में मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए इसे विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया और इसमें बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में भी 90:10 के अनुपात में वित्तपोषण की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि जिन कठिन परिस्थितियों को देखते हुये राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया, वे परिस्थितियां अभी भी बनी हुई हैं।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने हांलांकि, इस बात का आभार व्यक्त किया कि केंद्र द्वारा उत्तराखंड के लिए कोर केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 90:10 व केंद्र प्रायोजित वैकल्पिक योजनाओं में 80:20 का अनुपात फिर से बहाल किए जाने का निर्णय लिया गया है।
राज्य के विकास में विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) जैसी संस्थाओं से बाहरी सहायता प्राप्त योजनाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए रावत ने कहा कि इनसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कार्यशैली अपनाने के अनुभव व कार्यकुशलता से राज्य के विकास में सहायता मिलती है। उन्होंने याद दिलाया कि इस तरह की बाहरी सहायता प्राप्त योजनाओं में उत्तराखंड के कार्य निष्पादन की केंद्र द्वारा प्रशंसा की भी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय द्वारा कर्ह योजनाओ के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं और उत्तराखंड सरकार द्वारा भी लगभग दो हजार करोड़ रूपए के अनेक प्रस्ताव भेजे गए हैं जिनमें पेयजल, शिक्षा, आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। जारी
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार के पास इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी है और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिये भी फंडिंग 90:10 के अनुपात में कर दी जाये। रावत ने कहा कि केंद्र की नई व्यवस्था में ब्लॉक ग्रान्ट रोकने से उत्तराखंड को वर्तमान वित्तीय वर्ष में कुल 2,800 करोड़ रुपये की राज्य को हानि हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया गया है लेकिन इसके बावजूद राज्य को चालू वित्तीय वर्ष में 1,500 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
आर्थिक सर्वे का हवाला देते हुए रावत ने कहा कि उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जिसे नई व्यवस्था में केंद्रीय सहायता (सीएएस) में नुकसान हुआ है। उन्होने कहा कि जहां अन्य राज्यों को सीएएस में प्रति व्यक्ति एक हजार रूपए का लाभ हो रहा है वहीं उत्तराखंड को 48 रूपए प्रति व्यक्ति नुकसान हुआ है।
रावत के अनुसार नयी व्यवस्था में अरूणाचल प्रदेश को 33 हजार रूपए प्रति व्यक्ति व मिजोरम को 17,900 रुपये प्रति व्यक्ति लाभ हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का 65 फीसदी भाग वनाच्छादित है और वन संबंधी बाध्यताओं व अन्य कारणों से जल विद्युत व पर्यटन के सम्भावित राजस्व से राज्य को वंचित होना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान बी के चतुर्वेदी कमेटी की उस संस्तुति की ओर भी आकृष्ट किया जिसमें कहा गया है कि सकल बजटीय सहायता का दो प्रतिशत 11 हिमालयी राज्यों के लिए प्राविधानित किया जाना चाहिये।