भविष्य निधि संग्रह में प्राइवेट बैंकों को शामिल करने का प्रस्ताव खारिज

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन :ईपीएफओ: की परामर्शदात्री समिति ने नियोक्ताओं से भविष्य निधि अंशदान के संग्रह के लिये आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस तथा एचडीएफसी बैंक जैसे निजी बैंकों की सेवा लेने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

ईपीएफओ न्यासी तथा भारतीय मजदूर संघ :महाराष्ट्र: के महासचिव पी जे बानासुरे ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘वित्त, आडिट तथा निवेश समिति :एफएआईसी: ने निजी बैंकों आईसीआईसीआई, एक्सिस तथा एचडीएफसी बैंक को जोड़ने का प्रस्ताव खारिज कर दिया।’’

ईपीएफओ की तरफ से इस समय स्टेट बैंक, भविष्य निधि अंशदान का संग्रह करता है। सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों को भविष्य निधि प्राप्ति के लिये अधिकृत करने का काम प्रगति पर है। एफएआईसी ने सिफारिश की है कि इन तीन बैंकों को ईपीएफओ की तरफ से भविष्य निधि योगदान के संग्रह करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

समिति की सिफारिश को ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड :सीबीटी: की सात जुलाई 2016 को होने वाली बैठक में रखा जाएगा। सीबीटी के अध्यक्ष केंद्रीय श्रम मंत्री हैं।

सामान्य तौर पर एफएआईसी की सिफारिशों को सीबीटी स्वीकार कर लेता है। ईपीएफओ करीब 25 प्रतिशत भुगतान एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक तथा आईसीआईसीआई बैंक के जरिये प्राप्त करता है।

एफएआईसी ने यह भी सिफारिश की है कि सात कंपनियों द्वारा लगाई गई बोली का मूल्यांकन करने के बाद ईटीएफ निवेश को भी स्टेट बैंक म्यूचुअल फंड और यूटीआई द्वारा प्रबंधित किया जाना चाहिये।

ईपीएफओ के ईटीएफ में निवेश को प्रबंधित करने के लिये आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल, रिलायंस कैपिटल, एचउीएफसी, एलआईसी और कोटक महिन्द्रा दौड़ में शामिल हैं। ईपीएफओ ने पिछले साल अगस्त से ईटीएफ में निवेश करना शुरू किया है। यह काम एसबीआई म्यूचुअल फंड के जरिये किया जा रहा है। उसके साथ यह समझौता 30 जून (आज) समाप्त हो रहा है।