मिर्गी रोग के शर्तिया इलाज का दावा करके रोगियों को नशीली दवाएं बेचने व खिलाने के आरोपी चर्चित डॉ. आरके गुप्ता पर दर्ज मुकदमे सरकार ने वापस लेने की तैयारी कर ली है। गृह विभाग की ओर से इस मामले में फाइल आगे बढ़ाई जा चुकी है। जिस पर अभी न्याय विभाग से विधिक परामर्श मांगा गया है।

फिलहाल तो मुकदमे की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। लेकिन अचानक इस चर्चित मामले में दर्ज मुकदमे की वापसी की तैयारियों से पूरे महकमे में खलबली मच गई है।

आयुर्वेदिक दवाइयों के नाम पर मिर्गी रोगियों को नशीली दवाइयां बेचने के आरोप में तीन अगस्त 2004 में ऋषिकेश स्थित नीरज क्लीनिक पर राज्य ड्रग कंट्रोलर और प्रशासनिक अफसरों ने छापेमारी की थी। मौके पर छानबीन में पाया गया कि एलोपैथिक दवाइयों में प्रतिबंधित साइकोथैरेपिक दवाइयां फिम्सोबार, इपिलॉन, क्लोरोडाई और फिनोबारबिटॉन आदि का मिश्रण बेचा जा रहा था।

drugs

मौके से बड़ी तादाद में पाई गई इन दवाइयों को सीज करने के साथ ही डॉ. आरके गुप्ता के खिलाफ ऋषिकेश कोतवाली में एनडीपीएस एक्ट एवं धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर डॉ. गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए तमाम स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उसे फरार घोषित कर दिया गया और 11 दिन बाद उसे क्लेमेंटटाउन क्षेत्र से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद देशभर से तमाम शिकायतें पुलिस को मिलीं। करीब 27 महीने जेल में रहने के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। फिलहाल मुकदमे की सुनवाई कोर्ट में चल रही है।

medicines

इधर, डॉ. गुप्ता ने जोड़तोड़ करके अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की अर्जी मुख्यमंत्री कार्यालय में दी। यहां से मामला गृह विभाग को भेजा गया, जहां पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट मंगाई गई।

खबर है कि काफी दबाव के चलते रिपोर्ट आनन-फानन में गृह विभाग को मिल गई है, जिसे ऊपर बढ़ा दिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में डॉ. गुप्ता के पक्ष में फैसला लेने की तैयारी हो चुकी है।