दलितों के मंदिर प्रवेश को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में सोमवार को एक सुखद और आपसी भाईचारे को बढ़ाने वाली नई परंपरा की शुरुआत हुई।

दरअसल यहां पहली बार क्षेत्र के किसी दलित गांव में देवताओं की पालकी पहुंची। इस नई परंपरा की शुरुआत हुई दलित गांव चामड़ी से। इसे लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल था।

लोगों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा से शिलगुर और विजट देवता की पालकी का स्वागत किया। खास बात यह रही कि इस मौके पर आयोजित भंडारे में सभी भेदभावों को भुलाकर सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ प्रसाद ग्रहण किया। इस परंपरा को क्षेत्र में अक्सर होने वाले विवादों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोगों ने नाच-गाकर देव पालकी का स्वागत किया
चामड़ी गांव निवासी दौलतू के निमंत्रण पर सोमवार को देव पालकियां पहली बार कनबुआ से दलित गांव चामड़ी पहुंची। जगह-जगह लोगों ने फूलों के साथ देव पालकी का स्वागत किया। शाम करीब चार बजे देव पालकी ने चामड़ी गांव में प्रवेश किया। इस दौरान पूरा गांव देव उद्घोष से गूंज उठा। देव पालकी को कंधा देने के लिए लोग आतुर दिखे।

सबसे आगे सफेद और लाल रंग की पताका चल रही थी। जिसके पीछे पद चिन्ह और सबसे अंत में देव पालकियां चल रही थीं। देव पालकियां साहिया पाटन, मोकाडखड्ड, धोइराछानी होते हुए चामड़ी गांव पहुंची। लोगों ने नाचकर देव आराधना की। देर शाम तक जागड़ा चलता रहा। इस मौके पर आयोजित भंडारे में लोगों ने प्रसाद गृहण कर पुण्य कमाया। रात्री प्रवास के बाद मंगलवार को देव पालकी वापस कनबुआ गांव के लिए प्रस्थान कर गई।

स्थानीय लोग नई परंपरा से खुश
पुजारी खुशीराम शर्मा ने कहा, जौनसार बावर के मंदिर सभी समुदाय के लोगों के लिए खुले हुए हैं। कुछ लोग क्षेत्र की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। देवता की इच्छानुसार ही पालकियां चामड़ी गांव पहुंची।

प्रधान बहादुर सिंह पंवार ने कहा, देव पालकी के गांव आगमन से दलित समुदाय में खुशी का माहौल है। क्षेत्र में सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं। कहीं भी कोई भेदभाव नहीं। देव पालकी के काफिले में सवर्ण परिवारों के भी कई लोग शामिल रहे। जिन्होंने एक साथ भंडारे में प्रसाद गृहण किया।

तरुण विजय पर लोगों ने हमला किया था
जौनसार बावर में दलितों के मंदिर प्रवेश को लेकर पूर्व में अक्सर विवाद होते रहे हैं। 20 मई को दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए पोखरी गांव पहुंचे तत्कालीन राज्यसभा सांसद तरुण विजय पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। इसमें तरुण विजय और आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के संरक्षक दौलत कुंवर घायल हो गए थे।

क्षेत्र में अक्सर विवाद हो रहे हैं-

  • पांच अक्टूबर 2015 को गबेला स्थित कुकर्शी महाराज मंदिर में जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा में शामिल दलितों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ही दलित देव दर्शन कर पाए थे।
  • 23 अक्टूबर 2015 को दशहरा पर्व पर लक्सियार स्थित महासू मंदिर में पहुंची दलित महिला और परिजनों के साथ मारपीट की शर्मनाक घटना हुई। अगले दिन सांसद तरुण विजय के हस्तक्षेप के बाद दलितों ने महासू देवता के दर्शन किए।
  • 28 दिसंबर 2015 को महासू मंदिर हनोल में दर्शन के दौरान ग्राम पंचायत किनोटा निवासी दलित युवक दिनेश को जान से मारने की धमकी दी गई। उसके साथ मारपीट भी कई गई। मामला कालसी थाने में दर्ज हुआ।
  • 29 अप्रैल 2016 को रंगेऊ गांव में दलित सिपाही गीताराम निवासी बिसोई को गांव में स्थित मंदिर में दर्शन नहीं करने दिया गया। बारात के लौटते वक्त मंदिर के गेट पर ताला लगा दिया गया।