सालों से सरकारी मकानों व जमीन के कब्जाधारियों को खाली कराने के बजाए नैनीताल नगर पालिका ने उनको ही अपनी जमीन बेचने का मन बना लिया है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जो नए कर्मचारी आएंगे वो कहां रहेंगे?

नैनीताल नगर पालिका अब अपनी जमीन को लुटाने पर चर्चाओं में है। नगर पालिका ने 500 से ज्यादा मकानों को उन्हीं लोगों को बेचने का मन बना लिया है, जिनका उन पर फिलहाल कब्जा है। इतना ही नहीं पालिका दुकानों और जमीनों के कब्जाधारियों को भी मालिकाना हक देने जा रही है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पालिका से कब्जे की जमीन खाली करने का आदेश दिया, तो पालिका ने बोर्ड बैठक में फैसला लेते हुए अपने दुकान और मकान को बेचने का फैसला ले लिया। इसके बाद कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर इस बोर्ड बैठक का हवाला पालिका द्वारा कोर्ट में भी दे दिया गया। पालिका द्वारा अपनी सम्पत्ति तब कब्जेधारियों को बेची जा रही है, जब उसके नए कर्मचारियों के पास आवास ही नहीं है।

पालिका अध्यक्ष तो इसके लिए भी लाचार हो गए। पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण का कहना है कि बोर्ड बैठक में इसका फैसला लिया गया है और जिनके पास सम्पत्ति है उनको ही इस पर अधिकार दिया जा रहा है, क्योकि पालिका के पास न तो संसाधन हैं न ही सहयोग मिल रहा है और पालिका के पास यही एकमात्र रास्ता बचा है।

नैनीताल पालिका का ये कोई पहला कारनामा नहीं है, पिछली बोर्ड मीटिंग में ठेकेदारों को फायदा देने के मामले में सीबीआई जांच चल रही है, तो पालिका में बिजली के उपकरण घोटाला, डस्टबीन खरीद में गढबड़ी सहित, फाईलें गायब होने का मामला भी सामने आता रहा है। घूस लेने के मामले में तो एक जेई फिलहाल जेल में बंद है।

स्थानीय नागरिक अरविंद पडियार ने पालिका बोर्ड पर सवाल खड़े किए हैं। पडियार का कहना है कि पालिका का ये कदम गलत है, क्योंकि पालिका के कर्मचारियों के पास रहने को आवास नहीं हैं और पूराने लोगों को कब्जा बेचा जा रहा है, लेकिन अब नए कर्मचारी आखिर कहां रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि ये सिर्फ राजनैतिक रूप से लिया गया फैसला है जो गलत है।