विजिलेंस टीम ने देहरादून में राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को चकबंदी कार्यालय में 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। टीम ने उसके बाबूगढ़ स्थित आवास की भी तलाशी ली, लेकिन वहां कुछ खास नहीं मिल सका। कानूनगो ने एक किसान से जमीन पैमाइश के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। विजिलेंस ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा है।

विजिलेंस के डायरेक्टर अशोक कुमार ने मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि देहरादून के परगना पछवादून के एक किसान ने अपर पुलिस अधीक्षक सतर्कता प्रमोद कुमार को 24 जून को शिकायती पत्र देकर बताया कि उसकी भूमि की मेढ़ खुर्द-बुर्द होने के कारण भूमि की हद का पता नहीं लग पा रहा है।

भूमि की पैमाइश कराने के लिए पत्नी की तरफ से पांच मई को विकासनगर के एसडीएम को प्रार्थना पत्र दिया था। एसडीएम के निर्देश के बाद प्रार्थना पत्र राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल के पास पहुंच गया था। किसान का आरोप था कि पहले तो राजस्व निरीक्षक उन्हें टकराता रहा।

23 जून को मिलने गया तो गिरधारी लाल ने कहा कि जमीन की पैमाइश इस तरह नहीं होती है। तुम चार साल से तहसील के चक्कर लगा रहे हो। 50-60 हजार रुपये खर्च आएगा, वह हदबंदी करा देंगे। मिन्नत करने पर निरीक्षक 25 हजार रुपये पहले और 25 हजार रुपये काम होने के बाद लेने के लिए राजी हो गया।

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पेशगी के 25 रुपये लेने के लिए शनिवार को किसान को चकबंदी कार्यालय सेलाकुई बुला लिया। एएसपी द्वारा कराई गई गोपनीय जांच में आरोप की पुष्टि हुई तो ट्रैप टीम गठित कर दी गई।

टीम ने शनिवार दोपहर करीब एक बजे राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। डायरेक्टर ने टीम को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की। अपर पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार इस दौरान मौजूद थे।

देवरिया उत्तर प्रदेश के सलेमपुर का रहने वाला राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल 1992 से देहरादून जिले में तैनात है। पहले वह लेखपाल था, लेकिन प्रमोशन पाकर कानूनगो बन गया था। फिलहाल उसका परिवार विकासनगर के बाबूगढ में रहता है।

विजिलेंस डायरेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि एक साल में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम रंग लाई है। एक साल की अवधि में 36 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। इनमें 26 सरकारी कर्मी रिश्वत लेते हुए दबोचे गए हैं, इनमें नौ राजपत्रित अधिकारी शामिल रहे है। पहले औसतन छह से सात लोगों की गिरफ्तारी होती रही है।