अवैध सर्विस टैक्स के जरिए ठेकेदारों ने उत्तराखंड सरकार को लगाया करोड़ों का चूना

साल 2015 से पहले के ठेकों पर निर्माण एजेंसियां सर्विस टैक्स नहीं ले सकेंगी। आम बजट 2016 में यह प्रावधान किए जाने के बावजूद उत्तराखंड में कई एजेंसियों ने सरकार से सर्विस टैक्स की मद में करोड़ों रुपये वसूल लिए।

बुधवार को यह घपला पकड़ में आने के बाद वित्त विभाग ने मार्च 2015 से पूर्व के ठेकों के भुगतान में सर्विस टैक्स देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। वहीं दूसरी ओर ऐसे भुगतानों की सूची भी तलब की गई है, जिनमें नियम के खिलाफ सर्विस टैक्स का भुगतान ले लिया गया है। चूंकि ऐसे ठेके अरबों रुपये के हैं, लिहाजा हड़पा गया सर्विस टैक्स भी कई करोड़ रुपये से कम का नहीं होगा।

दायरे में न आने के बावजूद सरकारी निर्माण करने वाली एजेंसियों ने सर्विस टैक्स की मद में वित्त विभाग को करोड़ों का चूना लगा दिया। यह जानकारी मिलने के बाद वित्त विभाग में खलबली मची हुई है। एक-एक करके ऐसी सभी फाइलों को मंगाकर जानकारी जुटाई जा रही है कि आखिरकार कितनी रकम गलत तरीके से जारी करवा ली गई।

पहली नजर में मामले में वित्त विभाग की लापरवाही सामने आ रही है, क्योंकि भुगतान के पूर्व यह नहीं देखा गया कि संबंधित निर्माण सर्विस टैक्स की जद में आता भी है या नहीं।

दरअसल, केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर बोर्ड (सीबीईसी) ने साल 2016 के बजट में सरकारी संस्थाओं और निगमों द्वारा खुद या किसी अन्य संस्था द्वारा निर्माण या रिपेयरिंग कार्य करवाने की दशा में राहत दी थी। इसके तहत एक मार्च 2015 से पूर्व जारी किए गए ठेकों के भुगतान में सर्विस टैक्स से छूट दिया जाना था।

वित्त विभाग के सूत्रों की मानें तो इस छूट की जानकारी को विभाग ने गंभीरता से लिया ही नहीं। नतीजा यह हुआ कि छूट की अवधि वाले ठेकों पर संबंधित एजेंसियां और कांट्रेक्ट कंपनियां लगातार सर्विस टैक्स का भुगतान लेती रहीं।

एक अनुमान के मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे ठेके हैं, जो मार्च 2015 के पूर्व जारी किए गए थे और उनका भुगतान अब तक हो रहा है। इनकी राशि अरबों रुपये की है, जिसमें करोड़ों रुपये का भुगतान सर्विस टैक्स के रूप में किया गया।

बुधवार को एक फाइल में यह मामला पकड़ा गया तो खलबली मच गई। आनन-फानन में वित्तीय सलाहकारों से पूछताछ की गई तो सारी कहानी खुलकर सामने आ गई। इस पर सबसे पहले तो नए नियमों का पालन करते हुए सर्विस टैक्स देने पर रोक लगा दी गई है।

सरकार, सरकारी प्राधिकरण और निगमों के निर्माण कार्यों पर सर्विस टैक्स की छूट अरसे से चली आ रही थी, मगर एक अप्रैल 2015 से इसे वापस ले लिया गया। इसके चलते इन विभागों के सभी कार्य सर्विस टैक्स के दायरे में आ गए। इस नियम को साल 2016 के बजट में फिर शर्तों के साथ कुछ छूट दी गई। इसके तहत छूट केवल उन्हीं निर्माणों को दी गई, जिनमें निर्माण कार्य का ठेका 1 मार्च 15 के पहले जारी कर दिया गया है।

शर्त यह भी है कि इन कार्यों को 31 मार्च 2020 तक समाप्त करके भुगतान दे दिया जाएगा। वहीं यदि कोई कार्य एक मार्च 2015 के बाद जारी किया गया है, तो उस पर टैक्स देयता आएगी। इसके तहत नया निर्माण है तो ठेका मूल्य के 40 प्रतिशत हिस्से पर 15 फीसदी सर्विस टैक्स (कुल मूल्य का लगभग छह फीसदी) और रिपेयरिंग संबंधी कार्य में कुल ठेका मूल्य के 70 फीसदी हिस्से पर 15 फीसदी सर्विस टैक्स (कुल ठेका मूल्य का 10.5 फीसदी) दिया जाएगा।

इसी तरह सरकारी अस्पतालों या विद्यालयों के निर्माण और रिपेयरिंग के अलावा रक्षा विभाग के एमईएस के कार्य भी इसी दर से कर योग्य होंगे। बजट में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने गलती से मार्च 15 के पूर्व के ठेके के भुगतान पर टैक्स सरकार को जमा कर दिया है तो वह 30 सितंबर 16 तक रिफंड क्लेम कर सकता है।