राज्यपाल डॉ. के.के पॉल ने योग को भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का एक अभिन्न अंग बताते हुए उत्तराखंड के कहा कि इसके महत्व और वैज्ञानिकता को पूरे विश्व द्वारा स्वीकार किया जाना देश के लिए एक गर्व की बात है।

अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्वसंध्या पर अस्थायी राजधानी देहरादून में जारी अपने संदेश में पॉल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और जीवन शैली के अभिन्न अंग योग के महत्व तथा वैज्ञानिकता को आज पूरा विश्व स्वीकार कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रबल प्रयासों से 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने का ऐतिहासिक निर्णय इस बात को प्रमाणित करता है।

उन्होंने कहा कि देश की इस अनमोल धरोहर की उद्गम स्थली उत्तराखंड की ‘विश्व योग राजधानी’ के रूप में पहचान स्थापित हो चुकी है। ‘योग’ को सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला बताते हुए पॉल ने कहा कि यह धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक विशुद्ध विज्ञान है। उन्होंने कहा कि योग सम्पूर्ण चिकित्सा पद्वति है जो हमारे शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है।

kk_paul

योगाभ्यास से संयम, धर्य और सहिष्णुता जैसे मानवीय गुण पोषित होते हैं। यह मानसिक भटकाव तथा तनाव से मुक्ति का सबसे कारगर उपाय है। योग में ‘सम्भावनाओं को संभव’ में परिवर्तित करने की जादुई शक्ति निहित है।

राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान व तकनीकी के इस युग में इंसान कई तरह के मानसिक दवाबों के बीच जीने को मजबूर होकर तरह-तरह की बीमारियों का शिकार हो रहा है और ऐसे में योग ही एक ऐसा निर्विवादित और शुद्ध उपाय है जो सहज व स्वस्थ जीवन जीने की शक्ति दे सकता है।

उन्होंने कहा कि जीवन जीने की इस बेहतरीन शैली को अपनाने के लिए कुछ भी खर्च नहीं करना है और अपने चौबीस घंटों में से केवल कुछ मिनट योग को समर्पित करने हैं।

yoga-unसंयुक्त राष्ट्र बिल्डिंग

इस मौके पर लोगों से उन्होंने योग को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया तथा कहा, ‘ऋषि-मुनियों की तपोभूमि तथा योग की उद्गम स्थली उत्तराखंड से पूरे विश्व को तनाव मुक्त, स्वस्थ व आनंदित जीवन जीने के लिए योग को अपनाने का पैगाम दें।’