अब दुर्गम अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती ट्रांसफर की बजाए रोटेशन पर होगी

अब दुर्गम अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती एक-दो महीने के लिए होगी और फिर उन्हें वापस मूल अस्पताल में भेज दिया जाएगा। इसी तरह बारी- बारी सभी डॉक्टरों को खाली अस्पतालों में भेजा जाएगा और राज्य के सभी अस्पतालों में लोगों को इलाज देने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

राज्य सरकार प्रदेश के दुर्गम अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत सुगम के अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों को दुर्गम ट्रांसफर की बजाए कुछ समय के लिए रोटेशन पर वहां भेजा जाएगा।

राज्य में डॉक्टरों के 60 फीसदी पद खाली हैं। वर्तमान में 2160 पदों की तुलना में 900 के करीब डॉक्टर ही तैनात हैं। इस वजह से सरकार की पहाड़ पर डॉक्टर भेजने की हर योजना फेल हो रही है। जैसे ही सरकार सख्ती कर डॉक्टरों को पहाड़ भेजती है, डॉक्टर जाने की बजाए वीआरएस के लिए आवेदन कर देते हैं। इस वजह से एक दर्जन से ज्यादा डॉक्टर वैसे ही घर बैठे हुए हैं। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

डॉक्टर दुर्गम अस्पतालों में ट्रांसफर पर जाने की बजाए कुछ समय के लिए रोटेशन पर जाने को तैयार हैं। प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ ने इसके संकेत दिए। पीएमएचएस के प्रदेश महासचिव डॉ. नरेश नपलच्याल ने कहा कि डॉक्टर भी चाहते हैं कि राज्य के सभी लोगों को इलाज मिले। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए डॉक्टर दुर्गम जाने को भी तैयार है लेकिन इससे पहले सरकार को सभी डॉक्टरों के लिए डीएसीपी लागू करनी होगी।