मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य विधानसभा द्वारा पारित बजट के शेष बचे करीब 26780 करोड़ रुपये के उपयोग का अधिकार राज्य को अभी तक न मिल पाने के मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है, जिससे उसे सक्षम स्तर पर समय से अनुमति मिल सके।

प्रधानमंत्री को इस संबंध में लिखे एक पत्र में हरीश रावत ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने सहित विगत तीन माह के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य विधानसभा में 18 मार्च को 40422.20 करोड रुपये का बजट तथा विनियोग विधेयक पारित हुआ, जिससे राज्य के राज्यपाल ने राष्ट्रपति को भेज दिया।

उन्होंने कहा कि इसी बीच, 28 मार्च को राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त होने के क्रम में उत्तराखंड विनियोग (अधिनियम, 2016) प्रख्यापित किया गया जिसके अन्तर्गत मात्र 13642.43 करोड़ रुपये के बजट को पारित किया गया, जिसकी समयसीमा भी केवल 31 जुलाई तक ही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के शेष बचे 26779.76 करोड़ रुपये को समय पर उपयोग करने का अधिकार मिलने और राज्य के विकास कार्यों के निर्बाध रूप से चलते रहने के लिए उन्होंने 27 मई को राज्यपाल से निवेदन किया तथा एक प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजी, लेकिन अब तक दोनों की तरफ से राज्य सरकार को कोई जवाब नहीं मिला।

हरीश रावत ने कहा, ‘ऐसी परिस्थिति में मेरे पास दो विकल्प हैं। पहला, न्यायालय द्वारा प्रकरण में विनिश्चिय प्राप्त करना और दूसरा, उत्तराखंड की विधानसभा में पुन: इस विषय को मतदान के लिए प्रस्तुत करना। मुझे इन दोनों विकल्पों में यह संशय है कि भारत के संविधान में प्रदत्त केंद्र व राज्यों के संबंध तथा भारत के संघीय ढांचे की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह उपस्थित हो सकते हैं।’

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे की मर्यादाओं का समर्थक और पोषक बताते हुए कहा कि गणतंत्र में ऐसे विवादों को आप उत्पन्न नहीं होने देना चाहते और यदि इस प्रकार के विवाद कहीं उत्पन्न हो रहे हों तो आप निश्चित ही उन्हे आवश्यक मार्गदर्शन देकर सुलझाना चाहेंगे।

हरीश रावत ने कहा, ‘अत: आप इस प्रकरण में हस्तक्षेप करें ताकि संविधान के अनुच्छेद 200:207 के अतंर्गत 18 मार्च, 2016 को उत्तराखंड विधानसभा में पारित बजट तथा विनियोग विधेयक को सक्षम स्तर से ससमय अनुमति मिल सके।’ मुख्यमंत्री रावत ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भारतीय लोकतंत्र में अनेक ऐसे दौर आए हैं, जब राजनीति तथा शासन की दिशाएं आरोप-प्रत्यारोप के भंवर में फंसी है। लेकिन यह हमारा सौभाग्य है कि भारत का लोकतंत्र हमेशा ऐसे संक्रमण काल में और अधिक मजबूत होकर उभरा है।

जनसंख्या के आधार से उत्तराखंड को भारत के 100वें हिस्से से भी छोटा बताते हुए रावत ने कहा, ‘इस छोटे सीमावर्ती पर्वतीय राज्य के प्रमुख सेवक के रूप में यह मेरा दायित्व है कि भारतीय लोकतंत्र के सर्वोंच्च व्यक्ति से राज्य के हितों की रक्षा के लिए निवेदन कर सकूं।’