हमारा मनोबल बढ़ा है, रियो ओलंपिक में जीत सकते हैं मेडल : एस वी सुनील

चैंपियंस ट्रॉफी में अपने से ऊंची रैंकिंग वाली टीमों को हराकर पहली बार सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी स्ट्राइकर एस.वी. सुनील ने कहा कि इससे रियो ओलंपिक से पहले टीम का मनोबल काफी बढ़ा है और अब उन्हें ‘पोडियम फिनिश’ का यकीन है।

लंदन में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में अपना सर्वश्रेष्ठ करते हुए भारत ने सिल्वर मेडल जीता। फाइनल में विवादास्पद अंपायरिंग फैसलों के बाद टीम विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से पेनल्टी शूटआउट में हार गई।

सुनील ने स्पेन के वालेंशिया से ‘भाषा’ को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘चैंपियंस ट्रॉफी में खासकर फाइनल में प्रदर्शन के बाद रियो दि जिनेरियो ओलंपिक के लिए हमारा मनोबल काफी बढ़ा है। हमें लगता है कि पदक जीतने का सुनहरा मौका है और हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।’

उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में बड़ी टीमों को हराने का आत्मविश्वास पैदा हुआ है और इसका श्रेय डच कोच रोलेंट ओल्टमेंस को जाता है।

सुनील ने कहा, ‘पहले हम सभी बड़ी टीमों से घबराते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब हमें पता है कि हम दुनिया की किसी भी टीम को हरा सकते हैं और हमारी मानसिकता में यह बदलाव रोलेंट की वजह से आया है। वह हमेशा कहते रहते हैं कि आधुनिक हॉकी में टीमों में ज्यादा अंतर नहीं है और हम किसी को भी हरा सकते हैं।’

मानसिक दृढता के लिये किसी खास तैयारी के बारे में पूछने पर सुनील ने कहा कि यह खुद को लगातार प्रोत्साहित करने से आई है। उन्होंने कहा, ‘हम लगातार खुद को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं और उसी से मानसिक तैयारी में मजबूती मिली है। हम किसी भी बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।’

भारत ने इससे पहले बड़े टूर्नामेंट में पदक 1980 के मास्को ओलंपिक में जीता था, जब उसे ओलंपिक में आठवां और आखिरी स्वर्ण मिला था। यह पूछने पर कि अगस्त में होने वाले रियो ओलंपिक से पहले खेल के किस पहलू में सुधार की जरूरत है, सुनील ने कहा कि सर्कल के भीतर बेहतर फिनिशिंग पर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘हमें स्ट्राइकिंग जोन में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। अच्छे मूव को फिनिशिंग तक ले जाना जरूरी है। यदि इसमें सुधार हो गया तो हमें आगामी टूर्नामेंटों में इस लय को कायम रखने से कोई नहीं रोक सकता।’

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में अंपायरिंग को लेकर विवाद को निराशाजनक बताते हुए उन्होंने कहा, ‘पेनल्टी शूटआउट में अंपायरों को टाइमिंग को लेकर सतर्क रहना चाहिए था। उनकी गलती का खामियाजा हमें भुगतना पड़ा। हम फाइनल जीत सकते थे लेकिन हमने भी कुछ आसान मौके गंवाए हालांकि टूर्नामेंट में टीम के कुल प्रदर्शन से मैं बहुत खुश हूं। हम सभी ने इसके लिए बहुत मेहनत की थी जो कारगर साबित हुई।’