उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) कर्मियों का वेतन वृद्धि संबंधी शासनादेश जारी हो गया है। कैबिनेट ने 3000 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी की घोषणा की थी। हालांकि सर्विस चार्ज, सर्विस टैक्स और अन्य मदों में कटौती के बाद उपनलकर्मियों को प्रतिमाह 1600 रुपये ही बढ़कर मिल पाएंगे। उपनल कर्मियों के संगठन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

राज्य कैबिनेट की छह जून को हुई बैठक में सरकार ने घोषणा की थी कि उपनलकर्मियों के वेतन में प्रतिमाह 3000 रुपये की वृद्धि की जाएगी। शुक्रवार को इसका शासनादेश जारी हुआ तो कर्मचारियों में मायूसी छा गई।

दरअसल, उपनल को 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स और 2.5 प्रतिशत सर्विस चार्ज के रूप में जमा करना होता है। निगम यह धनराशि भी कर्मचारियों से ही वसूलता है। इसी तरह, नियमानुसार ईपीएफ और ईएसआई के मद में भी कर्मचारी के वेतन से कटौती होती है।

कैबिनेट की घोषणा से खुश हुए उपनलकर्मी अब शासनादेश के बाद खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सभी तरह के टैक्स कर्मचारियों से वसूलने से प्रतिमाह की यह बढ़ोतरी अब लगभग 1600 रुपये की ही रह गई है।

उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कवि का कहना है कि सरकार ने उपनलकर्मियों के साथ छलावा किया है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो उपनलकर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।