उत्तराखंड में प्लास्टिक अवशिष्ट के निस्तारण और उसे दोबारा उपयोगी बनाने के लिए राज्य में ‘सेंट्रल इंस्टटीयूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री हरीश रावत के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस संस्थान की स्थापना पर सहमति शुक्रवार को मुख्यमंत्री और केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार के बीच फोन पर हुई वार्ता में बनी।

बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना से राज्य में प्लास्टिक अवशिष्ट के निस्तारण के साथ ही नई तकनीक के प्रयोग से प्लास्टिक को रिसाइकल कर दोबारा उपयोगी बनाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार के साथ भागीदारी और साझेदारी के लिए राज्य सरकार की वचनबद्धता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार की ओर से इस संस्थान की स्थापना के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस संस्थान की स्थापना से हमारे युवाओं को शोध व रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर भी मिलेंगे।

प्लास्टिक के कारण पर्यावरण को हो रहे नुकसान का जिक्र करते हुए रावत ने कहा, ‘हमारा प्रयास होगा कि इस संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर इस संस्थान को एक बेहतरीन संस्थान के रूप में विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि देहरादून में देश की शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाएं स्थापित हैं, जो देश के लिए बेहतरीन शोध परक कार्य कर रही हैं।