अपने ही जाल में फंसते जा रहे हैं मुख्यमंत्री हरीश रावत, अब विधानसभा भंग कराने की तैयारी!

उत्तराखंड में उपजे वित्तीय संकट से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक कई राजनीतिक समस्याओं से घिरे मुख्यमंत्री हरीश रावत जल्द ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि चौतरफा समस्याओं से घिरे मुख्यमंत्री रावत यह कदम जल्द उठाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत दोपहर बाद अचानक दिल्ली जाने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश की आशंकाओं को और बल मिला है।

राजनीतिक हलकों से लेकर नौकरशाही तक में यह चर्चा आम रही कि मुख्यमंत्री रावत पार्टी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बजट सहित तमाम राजनीतिक समस्याओं से अवगत कराने और आलाकमान की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक विनियोग विधेयक को लेकर सरकार के सामने अजीब-ओ-गरीब संकट हैं। सरकार यदि विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर वित्त विधेयक को नए सिरे से पास कराना चाहे तो उसके सामने एक बार फिर फ्लोर टेस्ट जैसी स्थिति खड़ी जाएगी।

उधर, सियासी संकट के दौरान तमाम मोर्चों पर अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मंत्री नवप्रभात सहित दर्जनभर कांग्रेसी विधायकों को मंत्री बनाने को लेकर मुख्यमंत्री पर जबरदस्त दबाव है। सूत्रों की मानें तो नवप्रभात के अलावा कभी बीजेपी सांसद सतपाल महाराज खेमे में शामिल रहे पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी, विधानसभा उपाध्यक्ष अनुसूइया प्रसाद मैखुरी, डॉ. जीतराम, गणेश गोदियाल सहित दर्जनभर विधायक मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं। इन सभी दावेदारों के अपने-अपने तर्क भी हैं।

बीजेपी सरकार में मंत्री रह चुके विधायक राजेंद्र भंडारी का दावा है कि वे दो बार विधायक रहने के साथ ही वरिष्ठ नेता है। जबकि विधायक डॉ. जीतराम आर्य के लिए राजस्व एवं सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य खुले तौर पर मंत्री बनाने की मांग कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री रावत बजट सत्र बुलाकर नई मुसीबत नहीं मोल लेना चाहेंगे। अदालत के आदेश पर 10 मई को हुए फ्लोर टेस्ट और हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए हर कोई मुख्यमंत्री के साथ अपने-अपने अंदाज में राजनीतिक सौदेबाजी कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार मंत्री बनने की दौड़ में शामिल विधायक मुख्यमंत्री से आश्वासन ही नहीं, विधानसभा सत्र से पहले मंत्री बनाए जाने की जिद पर अड़ गए हैं। ऐसे में तमाम राजनीतिक झंझावतों के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से कर दें तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।

मंत्रियों, विधायकों का एक धड़ा इस पक्ष में है कि विधानसभा भंग कर तमाम परेशानियों से मुक्ति पा ली जाए, वहीं एक गुट ऐसा भी है जो इस बात का पक्षधर है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बजट पारित कराया जाए और सरकार का कार्यकाल पूरा किया जाए। लेकिन वर्तमान में राज्य में जो वित्तीय और राजनीतिक संकट खड़ा है, इसे देखते हुए यही लगता है कि अब यह सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं।