लंदन।… ऑस्ट्रेलिया ने पेनाल्टी शूटआउट में भारत को 3-1 से हराकर शुक्रवार देर रात चैम्पियंस ट्रॉफी-2016 का खिताब जीत लिया। यह ऑस्ट्रेलिया का 14वां खिताब है, जबकि भारत को पहली बार इस प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल मिला है। निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं होने के बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट के जरिए हुआ।

ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर टेलर लोवेल ने भारत के एसके उथप्पा, एसवी सुनील और सुरेंद्र कुमार को गोल नहीं करने दिया और अपनी टीम को सबसे अधिक बार चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब दिलाया।

भारत की ओर से हरनमप्रीत सिंह ने एकमात्र गोल किया जबकि ऑस्ट्रेलिया की ओर से एरॉन जालेवस्की, डेनियल बील और साइमन ओचार्ड ने गोल किए। भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश सिर्फ ट्रेंट मिटन को गोल करने से रोक सके।

बहरहाल, यह चैम्पियंस ट्रॉफी में भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। वह पहली बार फाइनल में पहुंचा था। साल 1982 में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। एक दिन पहले पूल मैच में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 2-4 से हारने वाली भारतीय टीम ने क्वीन एलिजाबेथ ओलम्पिक हॉकी सेंटर में बेहतरीन खेल दिखाया और विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को निर्धारित समय तक एक भी गोल नहीं करने दिया।

अंतिम पूल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ बेहद आक्रामक खेल दिखाते हुए शुरुआती 15 मिनट में ही दो गोल कर दिए थे, लेकिन भारत ने तीसरे और चौथे क्वार्टर में अच्छा खेल दिखाया था। भारत ने शुक्रवार को भी खेल का वही स्तर जारी रखा और ऑस्ट्रेलिया को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया ने एक पेनल्टी स्ट्रोक भी मिस किया।

यह अलग बात है कि ऑस्ट्रेलियाई रक्षापंक्ति ने उसे भी गोल करने का मौका नहीं दिया। भारत ने तीसरे और चौथे क्वार्टर में अपना वर्चस्व कायम रखते हुए ऑस्ट्रेलिया को खूब छकाया।

निर्धारित समय में एक भी गोल नहीं होने पर मैच का फैसला शूटआउट से होना निर्धारित हुआ। इस मैच के असल हीरो ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर टेलर लोवेल रहे, जिन्होंने भारत को शूटआउट में सिर्फ एक गोल करने का मौका दिया।

भारत का दुर्भाग्य रहा कि उसके लिए एसवी सुनील और एसके उथप्पा जैसे अनुभवी खिलाड़ी शूटआउट में गोल नहीं कर सके। इन दोनों के अलावा सुरेंद्र कुमार भी गोल करने से चूके।

भारत ने अब तक इस प्रतिष्ठित आयोजन का फाइनल नहीं खेला था। साल 1982 में भारत ने कांस्य पदक जीता था। तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में उसने पाकिस्तान को हराया था। भारत सात बार चौथे स्थान पर रहा है। भुवनेश्वर में आयोजित बीते संस्करण में भी भारत चौथे स्थान पर रहा था।

साल 1978 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया का वर्चस्व रहा है। उसने यह खिताब 1983 के बाद से कुल 14 बार जीते हैं। इसके अलावा वह 10 बार उपविजेता रहा है। पांच मौकों पर इस टीम ने कांस्य पदक भी जीते हैं।

शुक्रवार को ही जर्मनी ने ब्रिटेन को 1-0 से हराकर कांस्य पदक जीता। जर्मनी के लिए मैच का एकमात्र गोल मार्को मिल्टकाउ ने किया। मिल्टकाउ ने इस टूर्नामेंट में सबसे अधिक चार गोल किए।

इसी तरह पांचवें और छठे स्थान के लिए हुए मुकाबले में बेल्जियम ने दक्षिण कोरिया को 4-3 से हराया। एक समय बेल्जियम की टीम 1-3 से पीछे चल रही थी।

भारत के हरमनप्रीत सिंह को सबसे अच्छा जूनियर खिलाड़ी चुना गया। जर्मनी के तोबाएस हाउके टूर्नामेंट के श्रेष्ठ खिलाड़ी बने जबकि ब्रिटेन के जार्ज पिनर को सबसे अच्छा गोलकीपर चुना गया।