साल 2002 में गुजरात दंगे के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार के 14 साल बाद शुक्रवार को अहमदाबाद की एक अदालत ने इस मामले में 24 दोषियों में से 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा एक दोषी को 10 साल और 12 अन्य दोषियों को सात-सात साल कारावास की सजा सुनाई गई है।

विशेष जांच दल (एसआईटी) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पी.बी. देसाई ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में सजा सुनाते हुए गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार कांड को ‘नागरिक समाज के इतिहास में सबसे काला दिन’ बताया। उन्होंने अभियोजन पक्ष के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें मामले को ‘जघन्यतम’ की तरह देखने के लिए कहा गया था।

देसाई ने दोषियों को मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया, जिसकी अभियोजन पक्ष एवं पीड़ितों के वकीलों ने मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह फैसले में यह नहीं लिखेंगे कि उम्र कैद की सजा पाने वालों को उनकी आखिरी सांस तक जेल में रखा जाए।

सरकार चाहे तो आजीवन कारावास (14 साल) की सजा माफ कर सकती है, उसे संविधान से ऐसा अधिकार प्राप्त है, लेकिन देसाई ने सरकार से अपील की कि इस प्रावधान का उपयोग न किया जाए।

उम्र कैद की सजा पाने वाले सभी 11 हत्या के दोषी हैं, जबकि 10 साल कारावास की सजा पाने वाला एक दोषी हत्या की कोशिश का दोषी है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता अतुल वैद्य सहित 12 आरोपियों को दंगा व आगजनी का दोषी पाया गया। उन्हें सात-सात साल जेल की सजा सुनाई गई।

28 फरवरी, 2002 को लगभग 20-25 हजार हथियारबंद लोगों की भीड़ ने गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी पर हमला बोल दिया और कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित सोसायटी के 69 बाशिंदों को मौत के घाट उतार दिया था। सोसाइटी में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते थे।

गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार कांड के एक दिन पहले गोधरा के पास साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच को आग लगाए जाने की वीभत्स घटना घटी थी, जिसमें 59 हिंदू ट्रेन में जिंदा जल गए थे, जिनमें से अधिकांश विहिप समर्थक थे। अदालत ने दो जून को 60 आरोपियों में से 24 को दोषी ठहराया था, जबकि 36 को निर्दोष पाया था।

आजीवन कारावास पाने वालों में कैलाश लालचंद धोबी, योगेंद्र सिंह उर्फ लालू सिंह शेखावत, जयेश कुमार उर्फ गब्बर जिगर, कृष्ण कुमार उर्फ कृष्ण मुन्नालाल, जयेश रामजी परमार, राजू उर्फ मामू कनियो, नरेन सीताराम टैंक, लखन सिंह उर्फ लखियो, भरत उर्फ भरत तेली शीतल प्रसाद, विहिप के भरत लक्ष्मण सिंह राजपूत और दिनेश प्रभुदास शर्मा शामिल हैं।

मंगीलाल धूपचंद जैन को 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है।

जिन 12 लोगों को सात साल की सजा सुनाई गई है, उनमें सुरेंद्र उर्फ वकील दिग्विजय सिंह चौहान, दिलीप उर्फ कालू चतुरभाई परमार, संदीप उर्फ सोनू राम प्रकाश मेहरा, मुकेश पुखराज सांखला, अंबेश कांतिलाल जिगर, प्रकाश उर्फ काली खेंगारजी पढियार, मनीष प्रभुलाल जैन, धर्मेश प्रह्लादभाई शुक्ला, कपिल देवनारायण उर्फ मुन्नाभाई मिश्रा, सुरेश उर्फ काली दहयाभाई धोबी, विहिप के अतुल इंद्रवर्धन वैद्य एवं बाबूभाई हस्तीमल मारवाड़ी शामिल हैं।