कैलाश मानसरोवर यात्रा पर रवाना हुए 55 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बुधवार को अपने पैदल रास्ते के दूसरे शिविर गाला पहुंच गया। इस यात्रा को संपन्न कराने के लिए नोडल एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के महाप्रबंधक (पर्यटन) त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने बताया कि मानसरोवर तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बुधवार को अपने दूसरे शिविर गाला पहुंच गया है।

यह जत्था यहां से गुरुवार सुबह अगले शिविर बूंदी के लिए रवाना होगा। उन्होंने बताया कि कैलाश-मानसरोवर यात्रा के 82 किलोमीटर लंबे पैदल रास्ते में तीर्थयात्रियों के लिए चार शिविर बनाए गए हैं और सभी में पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

अधिकारी ने बताया कि धारचूला आधार शिविर से चलकर तीर्थयात्रियों का पहला जत्था मंगलवार की शाम अपने पहले शिविर सिख्रा पहुंचा था। उन्होंने बताया कि पूरे रास्ते में सभी संवेदनशील स्थानों पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के आपदा प्रबंधन और बचाव कर्मियों की तैनाती की गई है।

केएमवीएन सूत्रों के अनुसार, साल 1981 में तीर्थयात्रा के दोबारा शुरू होने के बाद से उत्तराखंड में स्थित लिपु-लेख दर्रे के जरिए अब तक 406 जत्थों में 14,317 श्रद्धालु तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत के दर्शन और पवित्र मानसरोवर झील की परिक्रमा कर चुके हैं। मर्तोलिया ने कहा, ‘इस साल हमें 18 जत्थों में 900 से ज्यादा तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है।’