एक विशेष अदालत ने मुंबई में मंगलवार को शराब कारोबारी विजय माल्या को ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया। माल्या को, कर्ज नहीं चुकाने और काले धन को सफेद करने के चल रहे मामले में माल्या को भगोड़ा घोषित किया गया है।

प्रीवेंशन ऑफ मनी लाउंडरिंग एक्ट (पीएमएलए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पी.आर. भावके ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के 10 जून को दाखिल किए गए एक आवेदन को स्वीकार करते हुए माल्या के विरुद्ध सार्वजनिक घोषणा जारी की।

अदालत ने कहा, ‘ईडी के आवेदन को स्वीकार किया जाता है और विजय माल्या के खिलाफ सार्वजनिक घोषणा जारी की जाती है।’ सोमवार को ईडी के वकील नितिन वेनगांवकर ने विशेष न्यायाधीश भावके से माल्या को भगोड़ा घोषित करने का अनुरोध किया था, ताकि उन्हें ब्रिटेन से देश लाया जा सके। माल्या करीब चार महीने से ब्रिटेन में हैं।

अपनी याचिका में ईडी ने कहा था कि माल्या ने उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों और जांच कार्रवाइयों से जुड़े उन्हें भेजे गए कई समन और गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट पर प्रतिक्रिया नहीं दी। इसे देखते हुए ईडी ने विशेष अदालत से अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत 61 वर्षीय माल्या को ‘भगोड़ा’ घोषित किए जाने की मांग की थी।

वेनगांवकर ने कहा कि कानून के मुताबिक घोषित भगोड़ा को 30 दिनों के भीतर अदालत के सामने उपस्थित होना होता है। ऐसा नहीं करने पर सरकार बकाए की वसूली के लिए उनकी संपत्ति जब्त कर उसे बेच सकती है।

दो दिन पहले माल्या ने उन पर लगाए गए सभी आरोपों को गलत बताया था और अपने खिलाफ चल रही जांच को अत्यधिक पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा था कि बगैर सुनवाई के ही उन्हें गुनहगार घोषित कर दिया गया।

माल्या के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने के लिए ईडी इंटरपोल से संपर्क स्थापित कर चुका है। केंद्र सरकार ने अप्रैल में माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया था और ब्रिटिश अधिकारियों से उनके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध किया था।