16 जून 2013 को बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने केदारनाथ में जबरदस्त तबाही मचाई थी। जान-माल का भारी नुकसान होने के साथ ही यहां के कई पैदल रास्ते, सड़कें और पुल भी बह गए थे। केदारघाटी के आपदा पीड़ित अब तीन साल बाद भी झूलापुलों के लिए तरस रहे हैं।

विजयनगर से लेकर कालीमठ घाटी तक झूलापुलों का निर्माण नहीं हो पाया है। आपदा में बहे पुलों के निर्माण का कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये खर्च तो किए गए, मगर जनता को राहत नहीं मिल पाई है। किसी तरह ट्राली या फिर कच्चे पुलों के सहारे लोग आवागमन करने को मजबूर हैं।

आपदा के तीन साल बाद भी केदारघाटी में झूलापुलों के न बनने से बरसात में प्रभावित क्षेत्र की जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विजयनगर में मंदाकिनी नदी के ऊपर लोक निर्माण विभाग ऊखीमठ ने अस्थाई लोहे की पुलिया लगा रही है, लेकिन नदी का जल स्तर बढ़ने से पुलिया पर संकट के बादल मंडराने लग गए हैं। यह पुलिया कभी भी धराशाई हो सकती है।

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पुलिया के आधार स्तंभ तेज बहाव में कभी भी ढ़ह सकते हैं। इतना ही नहीं पुलिया के ऊपर मजबूत टिन के बजाय विभाग ने पत्थर एवं सड़ी-गली टिन डाली है। जिससे कभी भी कोई दुर्घटना घट सकती है।

नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष अशोक खत्री ने कहा कि विजयनगर में बनाई गई पुलिया कभी भी नदी के तेज बहाव में ढ़ह सकती है। आपदा के तीन साल बाद भी पुल का निर्माण न होने से जनता की दिक्कतें कम होने के बजाय बढ़ रही हैं।