उत्तराखंड के विकास में केन्द्र और बीजेपी से सहयोग की इच्छा जताते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को कहा कि बजट राज्य की जरूरत है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वह गुहार लगाकर पूछेंगे कि राज्य के हिस्से का बजट कहां गया?

देहरादून में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में रावत ने कहा, ‘संघीय व्यवस्था में राज्य व केन्द्र एक दूसरे के सहयोगी होते हैं। बजट राज्य की जरूरत है। हमारा बजट विधानसभा से पारित बजट है। राज्य में राष्ट्रपति शासन के दौरान इस पर केन्द्र द्वारा कुछ निर्णय लिए गए, ऐसे में अब सारा दायित्व केन्द्र का बनता है।’

उन्होंने कहा, ‘मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि 18 मार्च के बाद हुई अप्रिय घटनाओं को भूलकर राज्यहित में मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। व्यापक हित में महत्वपूर्ण बिंदुओं को चयनित कर एक सामान्य सहमति बनाई जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘केंद्र में बीजेपी की सरकार है। हमें राज्य के विकास में केंद्र व बीजेपी का सहयोग चाहिए।’

रावत ने कहा, ‘मैं यह नहीं चाहता कि साल 2017 के चुनाव के बाद आने वाली सरकार को भी वही मुश्किलें झेलनी पड़े, जिनका सामना मैं कर रहा हूं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक चिंतित मुख्यमंत्री हूं। जो कठिनाई मुझे झेलनी पड़ रही है, मैं नही चाहता कि 2017 के चुनाव के बाद आने वाली सरकार को भी वही झेलनी पड़े। मैं चाहता हूं कि साल 2017 के बाद राज्य में संसाधनों का टोटा ना पड़े।’

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आर्थिक अनिश्चितता का वातावरण समाप्त करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री से गुहार लगाकर पूछेंगे कि ‘मेरू बजट कख गय’ (मेरा बजट कहां गया)।

उन्होंने कहा, ‘हम जनता में भी इस बात को लेकर जाएंगे। अब भी अवसर है कि हम राजनीति से ऊपर उठकर स्टैटसमेनशिप दिखाएं। बीजेपी सहयोग करे तो मैं तो यह भी मानने को तैयार हूं कि बजट का दस्तावेज हम सभी का साझा होगा। आर्थिक अनिश्चितता के वातावरण को समाप्त करना बहुत जरूरी है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अगर नए निर्णय नहीं ले सके तो 14 प्रतिशत की हमारी विकास की गति थम जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना केवल वर्तमान के लिए ही नहीं बल्कि भविष्य की योजनाओं का भी खाका होता है।

रावत ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न हिस्सों में आर्थिक रूप से तथा ढांचागत विकास में पिछड़ गए क्षेत्रों का सर्वेंक्षण भी करवाने जा रही है, जिससे उन पर विशेष तौर पर फोकस किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाया जा रहा है जो विकास से अछूते रह गए ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करेगा जहां अधिक प्रयास किए जाने की जरूरत है।