वन क्षेत्र में रोजगार के लिए युवाओं को कुशल बनाने और पहाड़ों से लोगों का पलायन रोकने में मदद के लिए अस्थायी राजधानी देहरादून में एक राष्ट्रीय वन कौशल विकास केन्द्र स्थापित किया गया है।

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को कहा, ‘यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है जहां पूरे भारत से युवा इकट्ठा हो सकते हैं और कौशल विकास का प्रशिक्षण ले सकते हैं। इससे उन्हें वन क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने में मदद मिलेगी और आजीविका की तलाश में पहाड़ों से दूसरी जगह पलायन करने वालों को रोकने में मदद मिलेगी।’

इस सीजन में उत्तराखंड में वनों में आग लगने से हजारों हेक्टेयर भूमि बर्बाद होने के बारे में जावड़ेकर ने कहा कि वन्यजीव संस्थान को राज्य में वनों में आग लगने और इससे हुए नुकसान पर 15 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

जावड़ेकर ने कहा कि राजाजी राष्ट्रीय उद्यान को केन्द्र द्वारा टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया है, जिससे पर्यटन को प्रोत्साहन मिले और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस क्षेत्र में रोजगार मिले, जिससे उन्हें अपने घरों से दूर न जाना पड़े।

उन्होंने कहा कि गोविंद वल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान का उन्नयन कर इसे हिमालयी पारिस्थितिकी का राष्ट्रीय केन्द्र बनाया जा रहा है, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान व अध्ययन का काम करेगा ताकि संकट के समय आपदा प्रबंधन में यह अपना योगदान कर सके। केन्द्र ने इसके लिए 24 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में छोटी ग्रामीण सड़कों के विकास में वन भूमि मंजूरी रोड़ा बन रही है, इसलिए 40 हेक्टेयर तक की वन भूमि के निपटान को स्थानीय स्तर पर कर दिया गया है।