विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सालाना कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ऐसा कुछ नहीं करें, जिससे भारत की छवि खराब हो। इस साल की यात्रा के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के दौरान सुषमा स्वराज ने कहा, ‘यह यात्रा दो देशों के क्षेत्रों से होकर गुजरती है।’

उन्होंने कहा, ‘जब हम भारत से चीन के क्षेत्र में दाखिल होते हैं, तो उनकी नजर हमारे व्यवहार व संस्कृति पर होती है।’ मंत्री ने कहा, ‘इसलिए कृपया ऐसा कुछ भी नहीं करें, जिससे उन्हें परेशानी हो।’

इस साल, उत्तराखंड के लिपुलेख तथा सिक्किम के नाथुला दर्रे से होकर यात्रा पर 1,430 श्रद्धालु 25 जत्थों में जा रहे हैं। पिछले साल 23 जत्थों में 999 श्रद्धालु यात्रा पर गए थे। अतिरिक्त श्रद्धालु व जत्था नाथुला दर्रे से होकर जाएंगे, जिसे पिछले साल चीन ने खोला था।

सुषमा स्वराज ने कहा कि यात्रा सुचारु रूप से जारी रहे, इसके लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘पहले यह होता था कि हमारे संपर्क अधिकारी श्रद्धालु के साथ संपर्क में रहते थे, लेकिन एक बार सीमा पार करने के बाद उनसे संपर्क खत्म हो जाता था।’

सुषमा ने कहा, ‘इस बार हमने एक टेलीफोन की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से वे हमसे लगातार संपर्क में रहेंगे।’ मंत्री ने कहा कि अब सरकार श्रद्धालुओं की स्थिति व चिकित्सकीय सुविधाओं से वाकिफ रह सकेगी और जब भी जरूरत पड़ेगी इसे उन तक पहुंचाया जाएगा।

सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि नाथुला दर्रा से वाहन भी जा सकता है और वरिष्ठ तथा बुजुर्ग लोग भी यात्रा कर सकते हैं।