छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी है। उन्हें बीएड करने का एक और विकल्प जल्दी मिलने वाला है। नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को बीएड पाठ्यक्रम चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

राज्य में अभी तक कुमाऊं विश्वविद्यालय और गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा बीएड पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है। लेकिन बीएड करने के इच्छुक अभ्यर्थियों की लंबी लाइन होने के कारण प्रवेश परीक्षा में मेरिट हाई होने की वजह से तमाम विद्यार्थी बीएड करने से वंचित रह जाते हैं।

इसके अलावा, अभ्यर्थियों को रेगुलर कोर्स में बीएड करने में प्रतिदिन क्लास अटेंड करना भी अनिवार्य होता है, जिसके कारण बीएड करते समय अभ्यर्थी कोई और कार्य नहीं कर पाते। इधर, राज्य में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार हो सके तथा अधिक से अधिक से युवा बीएड कर सकें, इसके लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने बीएड पाठ्यक्रम कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नव नियुक्त कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने पिछले महीने कार्यभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के साथ ही एनसीटीई द्वारा लगाई गई आपत्तियों को दूर किया। मुक्त विश्वविद्यालय ने नए सिरे से सभी औपचारिकताएं पूरी कर एनसीटीई जयपुर को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव को एनसीटीई ने मंजूरी दे दी है।

एनसीटीई से बीएड संचालित करने के संबंध में स्वीकृति पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त हो गया है। कुलसचिव प्रो. आरसी मिश्रा ने बताया कि दूरस्थ शिक्षा मोड में बीएड पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसमें कुल 500 सीटें होंगी। उन्होंने बताया कि बीएड पाठ्यक्रम दो साल का होगा तथा प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले किए जाएंगे।

इसमें अभ्यर्थियों को रोजाना क्लास अटेंड नहीं करनी होगी, केवल सप्ताह में एक-दो दिन वर्कशॉप में आना होगा, प्रैक्टिकल आदि एनसीटीई नियमों के तहत होंगे। उन्होंने बताया कि दूरस्थ शिक्षा परिषद से स्वीकृति के लिए प्रस्ताव लगा दिया गया है। दूरस्थ शिक्षा परिषद से भी जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गईं हैं।